जानी-मानी लेखिका अरुंधति राय ने गुरुवार को केंद्र सरकार की नीतियों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की और कहा कि देश को इस समय चार लोग ही चला रहे हैं, जिनमें से दो खरीदारी का काम करते हैं और दो बेचने का। आगे कहा कि जब मुख्यधारा के मीडिया समेत राज्य की ज्यादातर मशीनरी का दुरुपयोग हो रहा हो तो देश का आम नागरिक लोकतंत्र में विश्वास किस तरह से कर सकता है। वह पंजाबी यूनिवर्सिटी के सनी ओबराय ऑडिटोरियम में आयोजित समागम को संबोधित कर रहीं थीं।
किसान संघर्ष में पंजाबियों की भूमिका की तारीफ करते हुए अरुंधति राय ने कहा कि इस संघर्ष ने एक उम्मीद पैदा की है। इस संघर्ष ने लोगों को बताया है कि अपने वाजिब हक के लिए किस तरह से हुकूमत की आंख में आंख डालकर बात की जा सकती है। कश्मीर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह जो भी कहना चाहती हैं, अपनी रचनाओं में पहले ही कह चुकी हैं।
उन्होंने नर्मदा डैम संघर्ष के समय के अपने अनुभव को साझा किया और कहा कि कैसे वहां के स्थानीय आदिवासी लोगों को विकास के नाम पर उजाड़ा गया, इस संबंधी उनकी ओर से अपनी एक पुरानी रचना में कुछ सामग्री साझी की गई है, जिसके हवाले से उन्होंने बताया कि कैसे उस इलाके के लोगों की तरह सभी को अपने-अपने हकों को बचाने के लिए संघर्ष करने की जरूरत है। साथ ही कहा कि उनको अपना नावलकार होना आनंद देता है। वह भाषा को बहुत प्रेम करती हैं।