बजट 2021: अर्थशास्त्री प्रोफेसर जसविंदर सिंह बराड़।
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केंद्रीय बजट हर पक्ष को निराश करने वाला रहा। बजट में वेतन भोगियों और गृहणियों के तो हाथ खाली रहे ही, वहीं शिक्षा व कृषि क्षेत्र के लिए कुछ नहीं दिया गया है। सही मायनों में कहा जाए तो आंकड़ों का हेरफेर कर भरमाने की कोशिश भर इस बजट के जरिये की गई है। बजट में देश की चरमराती अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए केंद्र की कोई ठोस योजना नजर नहीं आती है। मालवा क्षेत्र की जानी-मानी पंजाबी यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री प्रोफेसर जसविंदर सिंह बराड़ ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में ये बातें कहीं।
शिक्षा क्षेत्र के नुकसान की भरपाई नहीं की
प्रोफेसर बराड़ ने कहा कि कोविड के कारण सभी आर्थिक गतिविधियां ठप थीं। इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। राजस्व व व्यव के बढ़ते अंतर को पटने के लिए केंद्र ने बजट में कोई ठोस योजना नहीं बनाई। खास तौर से कोविड काल में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देश के शिक्षा क्षेत्र को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। शिक्षा क्षेत्र का बजट नहीं बढ़ाया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जबकि कोविड संकट में शिक्षण संस्थान बंद रहने व केवल ऑनलाइन क्लास चलने से शिक्षा क्षेत्र को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
वेतन भोगियों को भी निराशा मिली
प्रोफेसर बराड़ ने कहा कि लोगों की आय बढ़ाने और रोजगार पैदा करने के मामले में भी यह बजट पूरी तरह से कमजोर साबित हुआ है। गृहणियों के हाथ खाली रह गए, क्योंकि बढ़ती महंगाई में आय के साधन न बढ़ाने व रोजगार न देने से उनके लिए घरों को चलाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश कम होने से पहले से ही कृषि कानूनों के कारण सड़कों पर भटक रहे किसानों की समस्याएं बढ़ेंगी।
वेतन भोगियों को भी बजट से निराशा हाथ लगी। न टैक्स स्लैब, न टैक्स रेट और न कटौती सीमा में कोई बदलाव किया गया। हालांकि कोविड महामारी के लिए 35 हजार करोड़ के प्रोविजन का कदम स्वागत योग्य है। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के किए जा रहे दावे की कोई रूपरेखा नहीं दिख रही।