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राज्य सरकार ने बंद की माता कौशल्या योजना : ज्याणी

Fri, 03 Jul 2015 09:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
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स्वास्थ्य मंत्री चौ. सुरजीत कुमार ज्याणी ने कहा है कि पंजाब स्वास्थ्य विभाग मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए वचनबद्ध है, लेकिन सरकार ने आर्थिक तंगी के कारण माता कौशल्या योजना को बंद किया है। ज्याणी शुक्रवार को अबोहर के सरकारी अस्पताल का दौरा करने के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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ज्याणी ने इलाज में कोताही बरतने व प्राइवेट मेडिकल स्टोरों से दवा मंगवाने के आरोप में दो डाक्टरों को स्थानांतरित कर फाजिल्का भेज दिया। ज्याणी ने कहा कि मरीजों की सुविधाओं में बढ़ोतरी करते हुए अस्पतालों में ही जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। जहां से मरीजों को वाजिब दामों पर दवाएं मिलती हैं।
 
माता कौशल्या योजना के बारे में ज्याणी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए 108 एंबुलेंस हर समय तैयार रहती है जो घर से प्रसूता को सरकारी अस्पताल तक लाकर प्रसव के बाद उसे घर तक छोड़ कर आती है। इतना ही नहीं गर्भवती महिलाओं के सभी प्रकार के टेस्ट भी अस्पताल में मुफ्त किए जाते हैं।
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2012 में फिर सत्ता में आने के बाद पंजाब सरकार ने शिशु व गर्भवती महिलाआें की मृत्युदर कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए माता कौशल्या योजना लांच की थी। इसके तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव करवाने वाली महिलाओं को आर्थिक सहयोग स्वरूप 1000 रुपये नगद दिए जाते थे।

हालांकि अगस्त 2014 के बाद पंजाब सरकार ने इस योजना पर ब्रेक लगा दिया। कुछ समय तक प्रसूता महिलाओं को यह कहा जाता रहा कि बजट आने पर उन्हें भुगतान किया जाएगा, लेकिन आज स्वास्थ्य मंत्री ज्याणी ने स्पष्ट तौर पर घोषणा कर दी कि फंड आदि की कमी के कारण माता कौशल्या योजना बंद कर दी गई है।

पूरे अस्पताल का दौरा करते हुए मंत्री ने मरीजों से यहां मिलने वाले इलाज के बारे में जानकारी ली। इसमें हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. वरिंद्र चौधरी व सर्जन अमन नागपाल की अधिकतर शिकायतें सामने आईं। ये डाक्टर मरीजों को कच्ची पर्ची पर दवाई लिखकर बाहर से मंगवाते थे।

इस पर मंत्री ने मौके पर ही इन दोनों डाक्टरों को यहां से स्थानांतरित कर फाजिल्का भेजने के आदेश जारी कर दिए। उन्हाेंने एसएमओ जगदीश टक्कर को भी अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए कुछ नए दिशा निर्देश जारी किए।
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