राजिंदरा अस्पताल के मरीज और तीमारदार रविवार को प्यास से तड़पते रहे। वहीं कर्मचारी भी पीने के पानी के लिए परेशान रहे। मजबूरी में अस्पताल परिसर में खुली दुकानों से मिनरल वाटर खरीदकर प्यास बुझाई।
अस्पताल शौचालयों में पानी नहीं आ रहा था। मरीजों के रिश्तेदार जिस भी टोंटी या वाटर कूलर के पास पानी की तलाश में जा रहे थे उन्हें निराश ही लौटना पड़ रहा था। महिलाओं व बच्चों की हालत भी काफी खराब थी।
पहले ही गर्मी की वजह से बीमार उन लोगों को काफी दिक्कत हुई, जिन्हें दस्त व उल्टी होने की समस्या थी। जहां उन्हें शौचालयों में पानी नसीब नहीं हुआ वहीं शरीर में पानी की कमी दूर करने के लियेे पीने का पानी भी नसीब नहीं हुआ।
तीमारदार गुरचरण सिंह ने बताया कि सुबह उठकर जब वो अपने बच्चे को बाथरूम में ले कर गया तो वहां पर बच्चे को धोने के लिये उसे पानी नहीं मिला। जैसे तैसे वो बाहर से पानी एक बोतल में भरकर लाया। इसके बाद दिन चढ़ते ही पीने के पानी की जरूरत पड़ी तो एक बोतल बाहर से खरीदी।
तीमारदार महिला परमजीत कौर ने बताया कि उसकी बहन यहां पर दाखिल है। गर्मी की वजह से उसे दस्त और उल्टी लगी हुई है। उसे बार बार टायलेट ले जाना पड़ रहा था। ायलेट में पानी नहीं मिला। वह बाहर से ही पानी लाई। यहां के कर्मचारियों से पूछा तो सभी यही कह रहे थे कि उन्हें खुद पानी पीने को नहीं मिल रहा वो उन्हें कहां से पानी लाकर दें।
इस संबंध में राजिंदरा अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. बीएल भारद्वाज से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वे छुट्टी पर हैं और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। पानी की समस्या के हल के लिये पिछले सप्ताह ही नई मोटर लगवाई गई थी।