चितकारा यूनिवर्सिटी के पास से निकलती एसवाईएल नहर को भरने का काम वीरवार को बाद दोपहर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर बंद कर दिया गया।
नहर पर लगे मुख्य मार्ग के पुल से करीब 100 मीटर नहर मिट्टी डालकर भर दी गई है। यूथ अकाली दल के लीडरों की अगुवाई में सुबह 9 बजे से नहर भरने का काम शुरू हुआ। आज 15 से अधिक जेसीबी मशीनें नहर के किनारों से मिट्टी निकाल कर नहर को भरने के काम पर लगी हुई थी। नहर के करीब 100 मीटर एरिया की स्लैब तोड़कर इसे समतल कर दिया गया है। दूसरे दिन कोई किसान नहर पर दिखाई नहीं दिया।
बाद दोपहर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पुष्टि होने के बाद काम रोक दिया गया। मौके पर मौजूद यूथ अकाली लीडर हरपाल जुनेजा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की वह पालना करते हैं और कोर्ट के आदेश पर काम बंद करा दिया है।
यूथ अकाली दल की ओर से एसवाईएल नहर को बंद करके जमीन संबंधित मालिकों को सौंपने के शुरू किए काम दौरान नहर के किनारों पर खड़े बड़ी गिनती में हरे-भरे पेड़ भी इसकी भेंट चढ़ गए। चाहे जेसीबी मशीनों ने बड़े स्तर पर पेड़ों को उखाड़ दिया है, लेकिन पेड़ काटने में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी लगे हुए थे। जो पेड़ काट कर अपने घर ले जा रहे थे। यह सिलसिला वीरवार को दूसरे दिन भी जारी रहा।
इस मौके पर वन विभाग के अधिकारी व मुलाजिम भी हाजिर थे, लेकिन उनके रोकने के बावजूद पेड़ उखाड़े व काटे जा रहे थे। वन विभाग के रेंज अफसर मखन सिंह ने कहा कि नहर के किनारे खड़े पेड़ जंगलात विभाग की संपत्ति हैं। जो विभाग के रिकार्ड में दर्ज हैं। पेड़ों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बिना काटा नहीं जा सकता है। इसका वातावरण को बड़ा खतरा हो सकता है। पेड़ों को काटने से रोकने के लिए रोका गया है। इस संबंधी विभाग के उच्चाधिकारियों व प्रशासन व संबंधित थानों के प्रमुखों को शिकायतें भेज दी हैं।