सीबीआई स्पेशल जज कंवलजीत सिंह बाजवा की अदालत ने रायपुर (छत्तीसगढ़) के एक युवक की अबोहर में उसके ससुराल में हुई मौत के मामले में पत्नी, सास व ससुर को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी पाते हुए सोमवार को सात-सात साल कैद की सजा सुनाई। सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
शिकायतकर्ता पक्ष की तरफ से सीनियर वकील बलवंत सिंह जंडू ने बताया कि रायपुर (छत्तीसगढ़) के रहने वाले सुनील कुमार का अपनी पत्नी तरुणा चौधरी के साथ मनमुटाव था। इस कारण वह अपने मायके घर अबोहर रह रही थी। इसी बीच सुनील के ससुर मोहन लाल चौधरी व सास संतोष चौधरी ने उसे साजिश के तहत अबोहर आकर पत्नी तरुणा को ले जाने के लिए कहा। जून 2003 को सुनील अबोहर आकर एक होटल में ठहरा। बाद में जब वह खाना खाने के लिए अपने ससुराल गया तो वहां उसकी रहस्यमयी हालात में मौत हो गई थी। सुनील की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी गर्दन पर तेजधार हथियारों के तीन कट के निशान थे जिससे उसकी मौत हुई थी।
वकील जंडू ने बताया कि मामले में जब पंजाब पुलिस की ओर से कत्ल केस खारिज करने की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की गई तो मरने वाले सुनील के पिता राम कृष्ण कलस ने पुलिस की इस कार्रवाई पर असंतोष जताया। साथ ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में रिट डाल दी। इसका निपटारा डबल बेंच ने करते हुए यह केस 17 मार्च 2008 को सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने जांच के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था।
इसी दौरान इन तीनों की एडिशनल सेशन जज परमजीत सिंह ने जमानत रद्द कर दी लेकिन हाईकोर्ट से तीनों को जमानत मिल गई थी। सोमवार को कोर्ट ने आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी पाते हुए सुनील की पत्नी, सास व ससुर को सात-सात साल कैद की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया।