एशिया की प्रसिद्ध स्टील सिटी मंडी गोबिंदगढ़ के लोहा व्यापारी स्क्रैप की लागत कम होने से बेहद परेशान हैं। उनकी परेशानी का मुख्य कारण बाहर से आने वाले स्क्रैप की लागत में गिरावट आना है। ये गिरावट बिजली के रेट बढ़ाने के कारण हुई है।
महंगी बिजली से हर महीनों लाखों करोड़ों का नुकसान हो रहा है। आने वाले दिनों में स्क्रैप विक्रेता तथा उद्योगपति इस झंझट से मुक्ति पाने के लिए एक बार फिर एक मंच पर इकट्ठा हो सकते हैं। यह बातें स्क्रैप ट्रैडर्स एसोसिएशन के संरक्षक जीवन गंभीर और स्माल स्केल एसोसिएशन के वक्ता जतिन सूद ने कहीं।
गंभीर और सूद ने कहा कि अगर सरकार ने बिजली के बढ़ाए गए रेट कम न किए तो एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जाना तय है। जिसके लिए अभी से सभी एसोसिएशन के अध्यक्षों से बातचीत की जा रही है है।
सूद ने बताया कि पिछले दो महीनों में 40 प्रतिशत स्क्रैप के दाम टूट चुके हैं, जिसका खमियाजा व्यापारी वर्ग को सहना पड़ रहा है। स्क्रैप का सही दाम न मिलने के कारण बाहरी देशों ने पंजाब की बजाय पड़ोसी राज्यों की और रुख तेज कर लिया है।
दोनों नेताओं ने बताया कि मौजूदा समय में प्रति यूनिट आठ रुपये के करीब औद्योगिक बिजली मिली रही। इससे सभी उद्योगपतियों ने अपनी फर्नेस इकाईयों में स्क्रैप की लागत को कम कर दिया है और जिन व्यापारियों ने स्क्रैप खरीदा है, उन्हें सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
आए दिन स्क्रैप मार्केट के दाम टूट रहे हैं और व्यापारी वर्ग बेहद परेशान है। उन्होंने आगे कहा कि डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पंजाब को बिजली सरप्लस सूबा होने के दावे कर रहे हैं, किंतु यह बिजली 70 फीसदी इंडस्ट्री बंद होने के बाद ही सरप्लस हुई।
सरकार फिर भी बिजली सरप्लस होने की बात पर जोर दे रही है तो उसे इंडस्ट्री की बिजली का रेट कम करना चाहिए। इन्होंने बताया कि बहुत जल्द सरकार के खिलाफ एक मंच पर उद्योगपति एवं व्यापारी वर्ग इकट्ठा होने जा रहा, जिसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।