पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पंजाबी विकास कांफ्रेंस के समापन के मौके पर पहुंची शख्सियत को सम्मानित करते वीसी डा. जसपाल सिंह।
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पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह ने कहा कि पंजाबी भाषा, साहित्य और सभ्याचार को ज्ञान विज्ञान से तोड़कर नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने पंजाबी के विकास के लिए कहा कि वर्तमान समय में पंजाबी भाषा के माध्यम से समाज में ज्यादा से ज्यादा वैज्ञानिक चेतना फैलाना ही शिक्षा, साहित्य, सभ्याचार और कला का मकसद होना चाहिए।
इस मौके पर वीसी ने आए मेहमानों को सम्मान चिन्ह् देकर नवाजा। वह यूनिवर्सिटी के पंजाबी भाषा विकास विभाग की ओर से आयोजित 33वीं अंतरराष्ट्रीय पंजाबी विकास कांफ्रेंस के समापन के मौके बोल रहे थे। इस मौके पर महाराजा रणजीत सिंह टेक्निकल यूनिवर्सिटी बठिंडा के वीसी डा. मोहन पाल सिंह ईशर ने कहा कि पंजाबी भाषा को विज्ञान की रोशनी में लपेट कर फैलाना चाहिए जिससे यह व्यक्तियों के लिए फायदेमंद हो।
पंजाबी साहित्य अकादमी लुधियाना के प्रधान डा. सुखदेव सिंह सिरा ने भारतीय संविधान के हवाले से कहा कि हमको अपने अस्तित्व के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है। पंजाबी एकेडमी दिल्ली के सचिव गुरभेज सिंह गुराइया ने कहा कि पंजाबी भाषा को रोजगारोन्मुखी बनाने के साथ हम हर क्षेत्र में आगे निकल सकते हैं। इस मौके पर विभाग के प्रोफेसर डा. अमरजीत कौर ने कांफ्रेंस के बारे में रिपोर्ट पेश की।