पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट पैदा हो गया है। छत्तीसगढ़ व झारखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण वहां कोयले की खानों में काम प्रभावित हो रहा है। इसका असर पंजाब के कोयला आपूर्ति पर पड़ रहा है। थर्मल प्लांटों में अब कुछ दिनों का स्टाक शेष रह गया है। अगर जल्द आपूर्ति बहाल न हुई तो इसका असर सीधे बिजली उत्पादन पर पड़ेगा और राज्य में फिर बिजली संकट गहरा सकता। कोयले की कमी को देखते हुए रोपड़ प्लांट की दो और लहरा मुहब्बत की एक यूनिट बंद कर दी गई है।
उधर, पावरकाम के निदेशक (जनरेशन) परमजीत सिंह का कहना है कि फिलहाल थर्मल प्लांटों में कोयला है और बिजली पैदावार प्रभावित न हो, इसके लिए केंद्र सरकार के स्तर पर बातचीत चल रही है। जानकारी के मुताबिक पंजाब के थर्मल प्लांटों के पास तीन से 12 दिनों का कोयला ही उपलब्ध है, जबकि मानकों मुताबिक 25 से 30 दिन तक का कोयला होना चाहिए।
गोइंदवाल थर्मल प्लांट में सबसे कम केवल तीन दिनों का 5.9 टन कोयला बचा है। जबकि सरकारी थर्मल प्लांट लहरा मुहब्बत में छह दिन, राजपुरा थर्मल प्लांट में 12 दिन, रोपड़ प्लांट में 8 दिन और तलवंडी साबो थर्मल प्लांट में नौ दिनों का ही कोयला बचा है। आम दिनों में पंजाब के थर्मल प्लांटों में रोजाना 12 से 15 रैक कोयला पहुंचता है लेकिन शुक्रवार को पंजाब को इससे आधा सिर्फ छह रैक कोयला मिलने वाला है। बताया जा रहा है कि इसके बाद अगले चार दिन पंजाब को कोयले की आपूर्ति नहीं होगी।
थर्मल प्लांटों में कोयले के संकट के चलते रोपड़ प्लांट की दो और लहरा मुहब्बत की एक यूनिट बंद कर दी गई है। बिजली सप्लाई में कमी के चलते पावरकाम को बिजली की मांग पूरा करने को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ रही है। उधर, विशेषज्ञ पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले के स्टाक में बड़ी कमी को चिंताजनक बता रहे हैं। उनके मुताबिक अगर यही स्थिति बनी रही तो थर्मल प्लांटों में पूरी तरह से बिजली उत्पादन ठप पड़ सकता है।