300 यूनिट बिजली मुफ्त देने के एलान से पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) पर सालाना अतिरिक्त 7000 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ जाएगा। खास बात यह है कि सरकार के इस फैसले के बाद अब पावरकॉम की सालाना आय का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा सब्सिडी पर निर्भर हो गया है। माहिरों का मानना है कि ऐसे में अगर पंजाब सरकार अपने पुराने रवैये के मुताबिक समय से सब्सिडी का भुगतान नहीं करती है तो पावरकॉम के लिए भयंकर आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
विभिन्न सब्सिडी के भुगतान में देरी से पावरकॉम के लिए आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। पावरकॉम को अपने खर्चे पूरे करने के लिए बैंकों से लोन लेना पड़ रहा है। इस समय पावरकॉम पर 17000 करोड़ का लोन है, जिस पर सालाना 1400 करोड़ का भारी ब्याज देना पड़ रहा है। इस लोन का बड़ा हिस्सा 10 प्रतिशत ब्याज पर है। अभी कुछ दिन पहले पावरकॉम ने 500 करोड़ का और लोन लेने के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं, जिससे पावरकॉम की मौजूदा वित्तीय स्थिति का पता लगता है।
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के जनरल सेकेटरी इंजीनियर अजयपाल सिंह ने कहा कि पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के मुताबिक सब्सिडी का भुगतान एडवांस में होना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है। बिजली सेक्टर पंजाब की आर्थिक स्थिति में एक बड़ा रोल अदा करता है। ऐसे में अगर सरकार की ओर से पावरकॉम को समय पर सब्सिडियों का भुगतान न किया गया, तो बड़ी आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
पंजाबी यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग से रिटायर प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा का कहना है कि प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति के मद्देनजर यह फैसला सही नहीं है। सरकार को यह एलान करने से पहले रोड मैप तैयार करना चाहिए था कि किस तरह से पंजाब की आय में वृद्धि करनी है। अगर सरकार को यह फैसला लेना ही था तो चरणबद्ध तरीके से इस योजना को अमलीजामा पहनाया जा सकता था। जैसे पहले केवल एससी व बीसी और बाद में अन्य वर्गों के उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे इसमें शामिल किया जाता।
पहले तो पंजाब सरकार को प्रदेश पर चढ़े तीन लाख करोड़ के कर्जे को कम करने व धीरे-धीरे आय में वृद्धि के तरीकों को लेकर विचार करके ठोस कदम उठाने चाहिए थे। साथ ही सरकार को बिजली सेक्टर के सुचारु संचालन के लिए भी रोड मैप तैयार करने की जरूरत है। जनकल्याण का मतलब यह नहीं कि हर वर्ग को मुफ्त की सुविधा दे दी जाए। जो बिल दे सकते हैं, उन्हें सरकार ने 300 यूनिट बिजली मुफ्त क्यों की है। इसे किसी भी तरीके से तर्कसंगत नहीं माना जा सकता है। पहले की सरकारों ने ही पावरकॉम की करोड़ों रुपये की सब्सिडी का भुगतान नहीं किया है।