पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी के कारण बिजली सप्लाई बड़े स्तर पर प्रभावित होने से आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे पावरकॉम को बड़ा झटका लग रहा है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च-अप्रैल 2022 के दो महीनों में पावरकॉम अब तक कुल 433.6 करोड़ की बिजली बाहर से खरीद चुका है। अगर कोयले का संकट इसी तरह रहा तो आने वाले धान के सीजन मे मांग में बड़ी वृद्धि के साथ बिजली की भारी किल्लत होने की पूरी आशंका है। जिसे दूर करने के लिए पावरकॉम को ज्यादा बिजली और महंगे दाम में खरीदनी पड़ सकती है। क्योंकि पैडी सीजन में मार्केट में बिजली के दाम में और तेजी आने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
पावरकॉम इस समय बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। एक तरफ पावरकॉम पर विभिन्न सरकारी व निजी वित्तीय संस्थाओं का 17000 करोड़ का कर्ज है, वहीं दूसरी तरफ पावरकॉम की 9000 करोड़ की सब्सिडी सरकार की तरफ पेंडिंग है। लगातार लिखने के बावजूद सरकार इस सब्सिडी की राशि की अदायगी नहीं कर रही है। खास बात यह है कि इस कर्ज पर ही पावरकॉम को सालाना 1400 करोड़ का ब्याज देना पड़ता है।
पावरकॉम के सीएमडी इंजीनियर बलदेव सिंह सरां का कहना है कि धान के सीजन में पंजाब में बिजली की कमी न हो, इसके लिए शार्ट टर्म खरीद समझौते किए गए हैं। साथ ही बैंकिंग के तहत देश के अन्य राज्यों तमिलनाडु, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल, मेघालय, मध्यप्रदेश, मणिपुर, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल के पास 1000 मेगावाट बिजली जमा की गई है। वहां से पैडी सीजन में बदले में 2300 मेगावाट तक बिजली मिलेगी। उन्होंने माना कि इस समय थर्मलों में कोयले की सप्लाई थोड़े-बहुत गुजारे लायक है। लेकिन उम्मीद है कि जून में पचवारा कोयला खदान का संचालन शुरू होने से स्थिति में सुधार होगा।