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अब एससी विद्यार्थियों से पीटीए फंड वसूलेगी पंजाबी यूनिवर्सिटी, छात्र जत्थेबंदियों ने जताया विरोध

Wed, 15 Jul 2020 11:55 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, पटियाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पंजाबी यूनिवर्सिटी से संबंधित कालेजों के एससी छात्रों को बाकी विद्यार्थियों की तरह फीसों के अलावा अब पीटीए फंड भी देना पड़ेगा। पहले एससी छात्रों को छूट मिली हुई थी। पीयू के इस फैसले खिलाफ विभिन्न छात्र जत्थेबंदियां भी मैदान में उतर आई हैं।
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पंजाब स्टूडेंट यूनियन (ललकार), पंजाब स्टूडेंट यूनियन (शहीद रंधावा), पंजाब स्टूडेंट यूनियन और पंजाब रेडिकल स्टूडेंट यूनियन के नुमाइंदों होशियार सलेमगढ़, रणधीर रंधावा, सृष्टि, रशपिंदर जिम्मी ने पीयू की ओर से एससी स्टूडेंट्स से पीटीए फंड लिए जाने की निंदा कर इसे वापस लेने की मांग की। जत्थेबंदियों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से शिक्षा और एससी विरोधी है।

शिक्षकों को तनख्वाहें व अन्य खर्चों के नाम पर वसूला जाता है पीटीए फंड
पंजाब के सरकारी शिक्षण संस्थानों में अध्यापकों को तनख्वाहें देने व अन्य खर्चों के नाम पर स्टूडेंट्स से फीसों के अलावा अलग तौर पर पीटीए फंड वसूला जाता है। इस फंड को पूरी तरह नाजायज कहा जाता है क्योंकि यह खर्च उठाना सरकार की जिम्मेदारी है। इस फंड से अब तक केवल पीयू के संबंधित कालेजों के एससी स्टूडेंट्स ही बचे हुए थे।
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सभी 13 कालेज गरीब छात्रों को शिक्षा देने को खोले गए हैं
पंजाब के यह सभी 13 संबंधित कॉलेज पिछड़े इलाकों के गरीब वर्ग के स्टूडेंट्स को शिक्षा देने के मकसद से खोले गए थे। इन कालेजों में 10 हजार से ज्यादा एससी स्टूडेंट्स शिक्षा ले रहे हैं। अब पंजाबी यूनिवर्सिटी की एक विशेष कमेटी ने पंजाब सरकार के 2018 की एक चिट्ठी के हवाले से फैसला किया है कि एससी वर्ग के स्टूडेंट्स को भी पीटीए फंड में छूट नहीं दी जाएगी।

इन कालेजों के ज्यादातर स्टूडेंट्स पहले ही फीसें देने में असमर्थ हैं। ज्यादातर स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ कोई कामकाज करके अपनी फीसें भरते हैं। बढ़ती फीसों के कारण पहले ही इन कालेजों में दाखिले कम रहे हैं। अब इस फैसले से एससी स्टूडेंट्स का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा से वंचित होने को मजबूर हो जाएगा।

स्टूडेंट जत्थेबंदियों का कहना है कि असल में पीयू अपने वित्तीय घाटे के लिए सरकार से बनती ग्रांट मांगने की बजाय स्टूडेंट्स पर बोझ डाल रही है। स्टूडेंट्स जत्थेबंदियों ने सरकार से केवल एससी स्टूडेंट्स के लिए ही नहीं सभी के लिए इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।
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