नोटबंदी के एलान ने लोहा समेत सभी कारोबारियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है। लोहा कारोबारी रोहित कौशल के मुताबिक तैयार माल की डिमांड कम हो गई है और 80 फीसदी लोहा और अन्य कारोबार ठप हो गए हैं 50 दिनों में इसके और भी भयंकर परिणाम सामने आएंगे।
जिस कारोबारी की सेल दो लाख रुपये थी और वह एक नंबर में काम भी करता था तो उसकी सेल 30 प्रतिशत रह गई है। सिर्फ लोहा कारोबार की बात करें तो प्रतिशतता दर 20 प्रतिशत से ही काम चल रहा है। रोहित ने कहा कि सरकार के नोटबंदी फैसले से जहां कारोबार में कटौती आएगी वहीं करोड़ों रुपयों का टैक्स के रूप में सरकार को आने वाला रेवेन्यू भी कम होगा।
उन्होंने कहा कि पुरानी करेंसी के लिए सरकार उन व्यापारियों और दुकानदारों को भी दायरे में ला सकती थी जिनसे लोगों की दिनचर्या चलती है। सरकार का फैसला बिलकुल सही है लेकिन 50 दिनों में कारोबारियों का मार्जिन तो खत्म होगा ही साथ में सरकार को भी आर्थिक नुकसान होगा।
स्माल स्केल इंडस्ट्री एसोसिएशन (स्मासरा) के प्रमुख प्रवक्ता और कोषाध्यक्ष प्रदीप भल्ला ने कहा कि नोटबंदी से लोहा इंडस्ट्री से जुड़े मजदूरों को ज्यादा दिक्कत आ रही है जिन्होंने रोज छुट्टे पैसों से दुकान से राशन लेना होता है। वहीं नोटबंदी से यूनिटों में तैयार माल की डिमांड कम हो गई है और कई जगह उद्योग कुछ समय के लिए बंद भी हो रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि देश की भलाई के लिए बड़ी सोच के तहत यह फैसला लिया गया है। अभी नेशन बिल्ड अप हो रहा है जिसमें कुछ समय तो जरूर लगेगा, लेकिन आगे-आगे सब सही हो जाएगा।
450 यूनिट पहले ही हो चुके हैं बंद
भल्ला ने बताया कि मंडी गोबिंदगढ़ में पहले भी टैक्सों की मार और अन्य सरकारी फरमानों से करीब 450 छोटी-बड़ी लोहा इकाईयां बंद हुई थीं। नोटबंदी से लोहा कारोबार में एक बार ठहराव तो जरूर आया है किंतु इसके आगे जाकर परिणाम अच्छे होंगे।