नेस्ले ने मोगा यूनिट में मैगी के उत्पादन पर रोक लगा दी है। स्थानीय नेस्लेे एचआर विभाग के प्रमुख डॉ. बीएस भुल्लर ने इसकी पुष्टि करते बताया कि ग्राहकों में गलतफहमी पैदा होने की वजह से बाजार से मैगी नूडल्स उत्पाद वापस मंगवाए जा रहे हैं। इससे ज्यादा कोई अन्य आदेश नहीं मिले।
उन्हाेंने बताया कि हर उत्पाद को आधुनिक लैबोरेटरी में क्वालिटी जांच के बाद ही मार्केट में बिक्री के लिए भेजा जाता है। नेस्ले के डिस्ट्रीब्यूटर संजय कुमार ने बताया कि करीब दो हफ्ते से शहर में मैगी का कोई दुकानदार ग्राहक नहीं है।
शहर की एक मसाला फैक्टरी से हर माह खरीदा जाने वाला करोड़ों रुपये का मसाला अब नहीं खरीदा जा रहा। एक अधिकारी के अनुसार कंपनी को कई हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।
इसके अलावा कंपनी को दोबारा बाजार में जगह बनाने में कम से कम दो साल लग सकते हैं। मार्केट से वापस मंगवाए गए पैकेटों को फिर से तैयार करने के बाद कंपनी आधुनिक तकनीकी लैबोरेटरी के जरिये क्वालिटी की जांच करवाएगी।
इसके बाद फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की सरकारी लैबोरेटरी से नमूने पास होने के बाद ही मार्केट में मैगी लाई जाएगी। कंपनी में काम कर रहे हजारों कर्मियों का भविष्य मैगी बंद होने से दाव पर लग गया है। कंपनी में काम करने वाले कर्मियों का मानना है कि उन्हें भविष्य में जल्द प्रमोशन की उम्मीद भी नहीं रही।
सेहत विभाग के अधिकारियों ने मैगी में आई भारी धातु लोगों के लिए हानिकारक बताते इसे खाने से गुरेज करने की सलाह दी है।
सेहत विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय नेस्ले फैक्टरी से मैगी के सैंपल लिए गए थे, लेकिन उन्हाेंने दावा किया कि इसमें कोई धातु मिलने की संभावना नहीं है, क्योंकि मैगी तैयार करने के लिए जलवायु का बहुत प्रभाव होता है। उन्हाेंने कहा कि पंजाब और उत्तर प्रदेश के जलवायु में अंत्र है।