अनाज मंडियों और खरीद केंद्रों में जलनिकासी का उचित प्रबंध नहीं हैं। इसकी पोल मंगलवार को बारिश होने पर खुल गई। जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त न होने से सुनाम अनाज मंडी में पड़ा किसानों का धान भीग गया।
इसके अलावा खरीदे गए धान की बोरियां भी भीग गईं। किसान खुद ही पानी को निकालने में जुटे हैं। मंगलवार की सुबह करीब साढे़ तीन बजे यहां बारिश होने लगी। अनाज मंडी में जलनिकासी का ठोस प्रबंध नहीं होने के कारण पानी सड़कों तथा फड़ पर जमा हो गया है।
इनसे फड़ में पड़ा किसानों का धान पानी में डूब गया। पानी निकाल रहे किसान तेजा सिंह, दर्शन सिंह, परमजीत सिंह आदि ने कहा कि मंडी में प्रबंध नाम की कोई चीज नहीं है। सड़कों पर पानी जमा है। गंदगी का आलम है। धान में नमी की मात्रा पहले से ही ज्यादा आ रही है। अब धान भीगने से उनकी चिंता बढ़ गई है।
भाकियू के जिला सचिव दरबारा सिंह ने कहा कि सरकार का किसानों की तरफ कोई ध्यान नहीं है। केवल बयान ही दिए जा रहे हैं। मंडियों के हालात दावों से कोसों दूर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मंडियों में सुविधाएं नहीं मिलीं तो यूनियन आंदोलन करेगी।
आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष भागीरथ राय ने कहा कि जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने लिए मुख्यमंत्री बादल व वित्त मंत्री ढींढसा से मांग की गई है। पानी निकासी नहीं होने के कारण किसानों को दिक्कत आ रही है।
मार्केट कमेटी के सचिव दर्शन कुमार ने कहा कि मंडी के फड़ को ऊंचा करने और जलनिकासी का प्रबंध जल्द किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने एक करोड़ रुपये देने का भरोसा दिया है। भीगा धान सुखाकर फिर से बोरियों में डलवाया जाएगा।