नूरपुरबेदी के एक रेस्टोरेंट में पीटकर मारे गए युवक का शव नूरपुरबेदी बस स्टैंड के पास सड़क पर रखकर पीड़ित परिवार और मजदूरों ने जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार एवं पुलिस के विरुद्ध जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
मृतक के भाई सतीश कुमार और सुनील कुमार ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि इस घटना में चार आरोपी थे। पुलिस ने मात्र दो आरोपियों के विरुद्ध ही मामला दर्ज किया है। जिसमें अभी तक एक नौजवान की पहचान जानने के लिए कोई कार्यवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन नौजवान की मौत को सड़क हादसा बनाना चाहती है।
मौत के तीसरे दिन भी बार-बार कहने पर एफआईआर की कापी नहीं दी गई और अंतिम संस्कार करने का दबाव डालते रहे, जिस कारण उन्हें लाश को मुख्य मार्ग पर रख कर जाम लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। मजदूरों के बढ़ते रोष को देखते हुए डीएसपी नंगल केसर सिंह और नायब तहसीलदार केसी दत्ता सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
जब मजदूरों ने प्रशासनिक अधिकारियों की एक न सुनी तो नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जगन्नाथ भंडारी, अकाली नेता दरबारा सिंह बाला, मनोज जोशी, प्रदीप पाठक, एडवोकेट मुनीश पुरी और नरिंदर बग्गा सहित शहर के बुद्धिजीवियों द्वारा समझाने पर मजदूरों की पांच सदस्यीय कमेटी की मौके पर ही चुनाव की गई। इन्हें पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में विश्वास दिलाया गया कि इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों को भी नामजद किया जाएगा और गंभीरता से जांच की जाएगी। प्रदर्शकारियों एफआईआर की कापी भी दी गई। इसके बाद शांत हुए प्रदर्शनकारियों ने तीन घंटे के बाद साढ़े 11 बजे जाम हटाया।
यह है मामला
बीती तीन सितंबर रात को करीब साढे़ 10 बजे कुछ नौजवान हमलावरों ने एक रेस्टोरेंट में काम करते नौजवान अनिल कुमार की पिटाई की थी। अनिल की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में बसपा नेता गुरचरण सिंह खालसा के पुत्र ओंकार सिंह और एक अज्ञात हमलावर सहित दो के विरुद्ध कत्ल का मामला दर्ज किया था।