फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व संगीत दिवस: दम तोड़ रही है संगीत घराना परंपरा, पैसा व ग्लैमर पाने का जरिया बना संगीत

Sat, 21 Jun 2025 03:09 PM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला

सार

85 साल की डाॅ. कपिला का जन्म पटियाला के प्रसिद्ध संगीत परिवार में जगदीश राय नरूला व ज्ञान कौर के घर में हुआ। उन्होंने संगीत के क्षेत्र में संगीत भास्कर, संगीत प्रवीण, संगीत अलंकार, संगीत प्रभाकर में शैक्षणिक शिक्षा लेने के साथ-साथ संगीत में स्नातकोत्तर डिग्री व डाक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की है। 
विज्ञापन
डाॅ. सुरिंदर कपिला - फोटो : फाइल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पटियाला घराने के प्रसिद्ध गायक उस्ताद मुनव्वर अली खान की शिष्या शास्त्रीय गायिका व जानी-मानी संगीत अध्यापिका डाॅ. सुरिंदर कपिला का कहना है कि अब संगीत घरानों की परंपरा दम तोड़ रही है और आगे इनका कोई भविष्य भी नजर नहीं आ रहा है।

विज्ञापन


विश्व संगीत दिवस पर अमर उजाला से विशेष बातचीत में डाॅ. कपिला ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और पाॅप, राॅक व हिप हाॅप जैसे लोकप्रिय संगीत ने शास्त्रीय संगीत पर असर डाला है। इससे कलाकारों के साथ इस शैली को सुनने वाले श्रोता भी काफी कम हुए हैं। अब संगीत को इलेक्ट्रानिक उपकरणों व तकनीकों का इस्तेमाल करके बनाया जाने लगा है। जबकि पहले वर्षों तक कड़ी तपस्या व
रिहर्सल करके कलाकार शास्त्रीय संगीत में महारत हासिल करते थे। अब संगीत केवल पैसा कमाने व ग्लैमर पाने का जरिया बन गया है। पहले की तरह गुरु-शिष्य परंपरा भी नहीं रही है। डाॅ. कपिला ने कहा कि दम तोड़ती शास्त्रीय संगीत को फिर से बढ़ावा देने की जरूरत है। जो इस कला में महारत प्राप्त हैं, उन्हें चाहिए कि वह बिना किसी स्वार्थ व पैसों के लालच के इसे युवा पीढ़ी को सिखाएं।

पटियाला में हुआ था जन्म

85 साल की डाॅ. कपिला का जन्म पटियाला के प्रसिद्ध संगीत परिवार में जगदीश राय नरूला व ज्ञान कौर के घर में हुआ। उन्होंने संगीत के क्षेत्र में संगीत भास्कर, संगीत प्रवीण, संगीत अलंकार, संगीत प्रभाकर में शैक्षणिक शिक्षा लेने के साथ-साथ संगीत में स्नातकोत्तर डिग्री व डाक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की है। 

विज्ञापन


उन्होंने पंजाब शिक्षा विभाग में बतौर लेक्चरर व प्रिंसिपल 40 साल अपनी सेवाएं दी हैं। वह संगीत के क्षेत्र में पांच पुस्तकें व अनेक शोध पत्र एवं निबंध लिख चुकी हैं। उन्हें देश-विदेश की कई संस्थाओं की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें पंजाबी यूनिवर्सिटी की ओर से पंजाब संगीत रत्न अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।  वे कहती हैं कि संगीत सीधा भगवान के साथ जुड़ने का एक जरिया है, लेकिन यह तभी हो सकता है जब मन में संगीत को लेकर जुनून और सुर व ताल की समझ हो, लेकिन आजकल सिखाने वाले भी पैसों के लिए काम कर रहे हैं और सीखने वालों में भी पहले जैसा जुनून नहीं है। आज श्रोताओं के पास भी अब धैर्य व संयम नहीं रहा कि वह समय निकालकर शास्त्रीय संगीत सुनें। इसलिए शास्त्रीय संगीत परंपरा खत्म होती जा रही है, जिसे दोबारा बढ़ावा देने की जरूरत है।

पटियाला घराने के बारे में  

पटियाला घराना हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का एक प्रमुख घराना है, जो पंजाब के पटियाला शहर के नाम पर रखा गया है। यह घराना मियां कल्लू द्वारा स्थापित किया गया था, लेकिन इसे लोकप्रिय बनाने का श्रेय अली बख्श खान और फतेह अली खान को जाता है। इस घराने से कई प्रसिद्ध गायक जुड़े हैं, जिनमें उस्ताद बड़े गुलाम अली खान, उस्ताद फतेह अली खान, अली बख्श खान, मुनव्वर अली खान और पंडित अजाय चक्रवर्ती शामिल हैं। पटियाला घराने की गायिकी में जोरदार व भावपूर्ण प्रस्तुति, तान और लय का सुंदर मिश्रण होता है। पटियाला घराना ख्याल गायिकी के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा ठुमरी, टप्पे, गजल शैलियों के लिए भी यह घराना जाना जाता है। बड़े गुलाम अली खान पटियाला घराने के सबसे प्रसिद्ध गायकों में से एक रहे हैं, जिन्होंने ख्याल गायिकी में विशेष योगदान दिया। इनके बेटे

विज्ञापन

मुनव्वर अली खान जिन्होंने पटियाला घराने को आगे बढ़ाया। मुनव्वर अली खान के बेटे रजा अली खान भी इस घराने के एक प्रमुख गायक रहे।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें