न करें विदेशों का रुख
गुरप्रीत शेरगिल का कहना है कि पंजाब के पढ़े-लिखे नौजवान होड़ में अपनी जमीनें बेचकर विदेशों का रुख न करें, बल्कि यहीं रहकर अलग तरह की फसलों की खेती शुरू कर नाम कमाए। यह सब्जियों की खेती से लेकर मशरूम फार्मिंग और मछली पालन भी हो सकता है। शुरुआत कुछ रकबे से की जाए। धीरे-धीरे रकबे को बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने फूलों की खेती करने के लिए पीएयू लुधियाना व कृषि विज्ञान केंद्र रौणी से प्रशिक्षण लिया। इसके बाद पिता व बड़े भाई कर्मजीत सिंह के सहयोग से उन्होंने शुरुआत एक एकड़ में गेंदे की खेती से की। उन्होंने खुद मार्केटिंग की। धीरे-धीरे वह फूलों की खेती का रकबा बढ़ाने के साथ-साथ फूलों की विभिन्न किस्में भी लगाने लगे। हालांकि, इस दौरान फूलों की खेती से लेकर इसकी मार्केटिंग तक में कई दिक्कतें आईं, लेकिन पीएयू लुधियाना के वैज्ञानिकों व पंजाब बागवानी विभाग के माहिरों की सलाह से वह इन्हें दूर करते रहे। इसके बाद जब मुनाफा होने लगा, तो उन्होंने फूलों की प्रोसेसिंग करके उत्पाद तैयार करने भी शुरू कर दिए।
25 लोगों को दिया रोजगार
गुरप्रीत शेरगिल बताते हैं कि आज वह गांव मुझाल खुर्द में 13 एकड़ पर गेंदा, गुलजाफरी, देसी गुलाब, गुलदाउदी, स्टेटिस, डेजी, ग्लेडियोलस व अन्य कई तरह के फूलों की खेती करते हैं। गुरप्रीत का हाई टेक फार्म हाउस में प्रोसेसिंग प्लांट के अलावा पैक हाउस, कोल्ड रूम भी हैं। वह बताते हैं कि फूलों को तोड़ने के बाद अगर दो-तीन के लिए इन्हें रखना है, तो कोल्ड रूम में आसानी से रखा जा सकता है। वहीं, पैक हाउस में फूलों की बाकायदा अच्छे से पैकिंग करके इन्हें आगे भेजा जाता है। उनकी ओर से तैयार फूल पंजाब के कई शहरों के अलावा चंडीगढ़ में सप्लाई होते हैं। गुरप्रीत के मुताबिक करीब 25 महिलाएं व पुरुष उनके फार्म हाउस पर काम करते हैं।
ये अवार्ड मिल चुके हैं
गुरप्रीत शेरगिल 2011 में पंजाब मुख्यमंत्री अवार्ड, 2012 में जगजीवन राम इनोवेटिव फार्मर अवार्ड, 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एनजी रंगा फार्मर अवार्ड, 2015 में इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएआरआई) से इनोवेटिव फार्मर अवार्ड प्राप्त हुआ है। उन्हें आईएआरआई से की तरफ से नेशनल एडवाइजरी पैनल का सदस्य भी चुना जा चुका है।