वीरवार अपनी मांगों को लेकर सात ग्रामीण और खेत मजदूर जत्थेबंदियों के साझे मोरचे के आह्वान पर मजदूरों ने शहर में जबरदस्त रोष प्रदर्शन करते हुए डीसी दफ्तर के सामने रोष धरना लगाया।
इससे पहले मजदूर शहर के बनासर बाग में इकत्रित हुए और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने को संबोधित करते हुए जत्थेबंदियों के नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार मजदूरों की स्वीकार की मांगों को लागू न करके मजदूर वर्ग के साथ दगा कर रही है। उन्होंने कहा कि साझा मोरचा की तरफ से पिछले समय चंडीगढ़ में लगाए तीन दिवसीय धरने दौरान सरकार ने मजदूरों की कई मांगों को स्वीकार कर लिया था किंतु अभी तक उन्हें लागू नहीं किया। इससे मजदूरों में सरकार प्रति भारी रोष पाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आटा दाल योजना के मसले, मनरेगा का बकाया, मजदूरों के नरमे संबंधी 65 करोड़ रुपये बांटने, पांच-पांच मरले प्लाट सहित अन्य मांगें पूरी न होने की सूरत में मजदूरों को मजबूरीवश संघर्ष की राह अपनानी पड़ रही है। धरने दौरान प्रस्ताव पारित किया कि गांव बालद कलां सहित अन्य गांवों में हुए संघर्ष दौरान दर्ज किए पर्चे रद्द करके मजदूर नेताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए और मजदूर नेता भगवंत सराओ के हमलावरों खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस मौके पर क्रांतिकारी पेंडू मजदूर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष संजीव मिंटू, खेत मजदूर यूनियन हरभगवान मूनक, मजदूर मुक्ति मोरचा के नेता गोबिंद सिंह छाजली, खेत मजदूर यूनियन के निर्मल सिंह, कुल हिंद खेत मजदूर यूनियन के नेता भूप चंद चन्नो, रोही सिंह, प्रीतम सिंह, होशियार सिंह, अजमेर सिंह मौजूद थे।