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खेत मजदूरों के धरने में बुजुर्ग महिला की मौत

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ग्रामीण और खेत मजदूर जत्थेबंदियों पर आधारित सांझा मजदूर मोर्चा के आह्वान पर पुडा ग्राउंड में लगाए तीन दिवसीय धरने में सोमवार रात एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। इससे भड़के मजदूरों ने प्रशासन व सरकार खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही से बुजुर्ग महिला की मौत हुई है। अगर धरनाकारियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए जाते, तो उनको मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ता। उधर, इसकी सूचना मिलते ही डीसी कुमार अमित ने मजदूर नेताओं को बैठक के लिए बुला लिया।
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मुआवजा न मिलने तक नहीं कराएंगे पोस्टमार्टम : कश्मीर सिंह
सांझा मोर्चा के नेता व देहाती मजदूर सभा के प्रदेश प्रेस सचिव कश्मीर सिंह घुगशोर ने बताया कि बैठक में डीसी ने उक्त बुजुर्ग महिला के परिवार को पांच लाख का मुआवजा दिलाने, एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने व परिवार के किसी भी सरकारी व गैर सरकारी कर्जे की माफी की मांग मान ली है। लेकिन मजदूर जत्थेबंदियों ने साफ किया है कि जब तक सरकार व प्रशासन की ओर से पांच लाख की मुआवजा राशि जारी नहीं की जाती, तब तक बुजुर्ग महिला का पोस्टमार्टम नहीं कराया जाएगा। बाकी मजदूरों की मांगों के हल को लेकर बुधवार को सीएम के मोती महल की तरफ रोष मार्च निकालने का एलान कर दिया।
धरने के दूसरे दिन मंगलवार को अपने संबोधन में सांझा मोर्चा के नेता और देहाती मजदूर सभा के महासचिव गुरनाम सिंह दाऊद, प्रदेश प्रेस सचिव कश्मीर सिंह घुगशोर ने कहा कि पुडा ग्राउंड में धरना लगाने से पहले मोर्चा की ओर से प्रशासन को यहां पानी, सेहत सेवाओं, आग बुझाने के दस्तों और शौचालय का प्रबंध करने की मांग की थी। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से उनकी सुरक्षा के लिए कोई प्रबंध नहीं किए गए। सोमवार रात बुजुर्ग महिला गुरतेज कौर (62) निवासी भूंदड़ जिला बठिंडा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। धरनाकारियों ने अपने स्तर पर प्रबंध किए और उन्हें सरकारी राजिंदरा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां बुजुर्ग महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह मौत हुई है।
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पंजाब सरकार से सभी चुनावी वादे पूरा करने और मजदूरों के समूचे सरकारी व गैर सरकारी कर्जे खत्म करने, बिजली के बिल के बकाया खत्म करने व बेघरों व जरूरतमंदों को प्लाट देने की मांग की गई। साथ ही केंद्र से लेबर कानूनों में किए संशोधन वापस लेने समेत तीनों खेती कानून रद्द करने की मांग भी जोरदार ढंग से उठाई गई।
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