पंजाब में थर्मल प्लांटों के कई यूनिटों को एक बार फिर से बंद कर दिया गया है। गर्मी शुरू होने के बाद से पावरकाम की ओर से प्लांटों के यूनिटों को खिलौने की तरह कभी चलाया और कभी बंद किया जा रहा है।
इससे प्लांटों की मशीनरी खराब होने का खतरा है। पावरकाम इसके पीछे तर्क बिजली की मांग का कम होना बताता है। इसके बाद भी प्राइवेट प्लांटों से बिजली लेना बंद नहीं करता है।
पंजाब में पिछले दो-तीन दिनों से बारिश का मौसम होने के कारण पारा लुढ़क गया है। बिजली की मांग कम होने के कारण पावरकाम ने शनिवार को लहरां मोहब्बत थर्मल प्लांट के चार में से दो यूनिट बंद कर दिए। वहीं बठिंडा प्लांट के चार यूनिटों में से इस समय तीन यूनिट बंद है।
वहीं रोपड़ थर्मल प्लांट के छह में से तीन यूनिट बंद हैं। सभी प्लांटों के कुल 14 यूनिटों में से इस समय केवल छह यूनिट ही चल रहे हैं।
अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर मानते हैं कि यूनिटों को बार-बार बंद करने और चालू करने से प्लांटों की मशीनरी के खराब होने का खतरा है। साथ ही फ्यूल भी काफी इस्तेमाल हो जाता है।
इससे पावरकाम को लाखों रुपये की चपत भी लगती है। पावरकाम के पीआरओ सुरजीत सिंह भट्टी ने कहा कि प्राइवेट प्लांटों से एग्रीमेंट के कारण बिजली लेनी पड़ती है, इसलिए बिजली की मांग घटने पर अपने यूनिट बंद किए जाते हैं। उन्होंने माना कि यूनिट बंद करके दोबारा चालू होने पर पावरकाम को काफी खर्चा पड़ जाता है।
पावरकाम को पचवाडा कोल ब्लाक से अभी तक कोयला मिलना शुरू नहीं हुआ है। इससे कोयले की सप्लाई प्लांटों को नियमित नहीं हो सकी है।
लहरां मोहब्बत प्लांट में इस समय केवल आठ, वहीं बठिंडा में 10 से 12 दिन और रोपड़ में 17-18 दिन का कोयला बचा है। कुछ दिन पहले तक प्रत्येक प्लांट में 20 से 25 दिनोंका कोयला था।