जाने-माने लेखक एवं कामरेड सतनाम सिंह जंगलनामा ने आत्महत्या कर ली। वह यहां सिऊना रोड पर अपने घर में अकेले रहते थे। 63 साल के सतनाम सिंह के माता-पिता की मौत हो चुकी है, जबकि पत्नी से उनका तलाक हो चुका था। उनकी बेटी रीवा की शादी हो चुकी है। उनका जंगलनामा उस समय उपनाम पड़ा, जब उन्होंने साल 2003 में जंगलों में जाकर वहां रह रहे आदिवासियों के बारे में जंगलनामा शीर्षक तहत नावल लिखा था।
उनका असली नाम गुरमीत सिंह था। 70वें दशक में नक्सलवादी लहर के दौरान वे बहुत सरगर्म रहे। उन्होंने मायोवादी लहर के गढ़ बस्तर में जाकर वहां के जीवन को देखकर नावल लिखा। पैंगुअन पब्लिशर ने जंगलनामा को अंग्रेजी में भी छापा। उन्होंने लेखकर हार्वर्ड फास्ट के नावल स्परटैक्स का पंजाबी में अनुवाद किया। उन्होंने जगमोहन जोशी की गजलों का पंजाबी में अनुवाद किया था। वह देश की मौजूदा सियासत प्रति चिंतित थे और कुछ समय से निराश रह रहे थे। संबंधित त्रिपड़ी थाना पुलिस ने इस सुसाइड के बारे में कोई भी जानकारी होने से इनकार किया।