सीमावर्ती थाना ममदोट में तैनात हवलदार शेर सिंह के कथित तौर पर कई तस्करों के साथ संबंध हैं। पहले कई तस्करों को पकड़वाने में शेर सिंह ने भूमिका निभाई, लेकिन पैसों की चकाचौंध ने उसे इस कदर प्रभावित किया कि तस्करों के साथ मिलकर नशीले पदार्थों की तस्करी करने लगा।
शेर सिंह सीआईए स्टाफ फिरोजपुर व अन्य थानों में तैनात रहा है। इस कारण उसे प्रत्येक तस्कर बारे जानकारी थी। खुफिया सूत्रों के अनुसार पुलिस ने शेर सिंह के साथ और कई पुलिस मुलाजिमों को नशीले पदार्थ की तस्करी के आरोप में पूछताछ संबंधी उठाया है।
एक पुलिस मुलाजिम फरार है। सूत्रों की मानें तो पुलिस मुलाजिमों का एक गिरोह है जो नशीले पदार्थों की तस्करी में जुटा हुआ है। पुलिस ने शेर सिंह को पिछले लगभग छह दिन से उठाया हुआ था और उससे पूछताछ की जा रही थी।
उसने ऐसे मुलाजिमों व कुछेक अधिकारियों के नाम बताए हैं, जिन्हें पुलिस ने गुप्त रखा है। बताया जा रहा है कि सीआईए स्टाफ में उक्त मुलाजिमों से पूछताछ की जा रही है।
ममदोट के वेयर हाउस के पास से 24जनवरी 2015 में बठिंडा की काउंटर इंटेलिजेंस ने आठ किलो हेरोइन और तीन लोगों को पकड़ा था, उसमें भी शेर सिंह का रोल बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ दौरान शेर सिंह की फाजिल्का, चंडीगढ़ व जलालाबाद में भी प्लाट खरीदने की बात सामने आई है। फिरोजपुर के सनराइज कालोनी में भी काफी बड़ी कोठी है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि शेर सिंह फिरोजपुर सेंट्रल जेल इसलिए नहीं जाना चाहता था, क्योंकि उसने ममदोट थाने में तीन-चार साल रह कर कई ऐसे लोगों पर नाजायज केस दर्ज किए हैं जो सेंट्रल जेल में बंद हैं। वे लोग जेल में उससे बदला ले सकते हैं।
पुलिस ने बाद में उसे मोगा की जेल में भेज दिया। आरोप है कि जिन तस्करों के साथ शेर सिंह की दोस्ती थी उन्हें नशा बेचने देता था और दूसरों का माल पकड़कर खुद बेच देता था और उन पर परचे दर्ज कर देता था।
सूत्रों के मुताबिक आज से तीन साल पहले एक एसएचओ अपने साथ शेर सिंह को ममदोट थाना लेकर गया था। उसी समय से शेर सिंह नशीले पदार्थ बेचने में जुटा रहा।
किसी भी एसएचओ ने शेर सिंह को रोकने की हिम्मत नहीं की क्योंकि उन्हें अपना हिस्सा मिल जाता था। जिन लोगों पर शेर सिंह ने नाजायज परचें किए थे उनके परिजनों ने पुलिस अधिकारियों को शिकायतें भेज कर शेर सिंह की हरकतों संबंधी अवगत करवाया।