पटियाला। खेती कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बार्डरों पर हुए आंदोलन में भाग लेने वाले पहली कतार के किसान नेताओं में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पटियाला पहुंचे संयुक्त किसान मोर्चा की 9 मेंबरी तालमेल कमेटी के सदस्य एवं क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रदेश प्रधान डा. दर्शन पाल ने निशाना साधते कहा कि कुछ किसान नेता इस भ्रम में हैं कि शायद पंजाब विधानसभा चुनाव लड़कर वह किसान मसलों का हल निकाल लेंगे।
हकीकत यह है कि किसान-मजदूर मसलों का हल चुनाव लड़कर नहीं, बल्कि हकूमत के खिलाफ तीखे संघर्ष करके किया जा सकता है। उन्होंने साफ किया कि क्रांतिकारी किसान यूनियन इस चुनाव दंगल से दूरी बनाकर रखेगा और उनकी जत्थेबंदी की समझ है कि चुनावों जरिये सत्ता में आने वाले चेहरे भर बदलते हैं जबकि सत्तारूढ़ पार्टियों द्वारा हमेशा लोक मसलों को नजरअंदाज किया जाता है। इस मौके डा. दर्शनपाल ने चुनावों के दौरान भाजपा की खिलाफत करने का भी एलान किया।
रविवार को पटियाला में अपनी जत्थेबंदी की जिला कनवेंशन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। गौरतलब है कि दिल्ली मोर्चे में हिस्सा लेने वाले किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल और गुरनाम सिंह चढ़ूनी की ओर से अपनी अपनी राजनीतिक पार्टियां बनाकर पंजाब में आने वाले विधानसभा चुनाव लड़े जा रहे हैं। इसको लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं में मतभेद हो गए हैं। कईं किसानों के राजनीति में आने से सहमत नहीं हैं।
डा. दर्शनपाल ने कहा कि मोदी सरकार की ओर से किसानों साथ किए वादे मुताबिक अभी तक एमएसपी बारे कमेटी बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। किसानों खिलाफ दर्ज केस वापस नहीं लिए गए। इसके अलावा लखीमपुर खीरी कांड के आरोपी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए चुनावों के दौरान भाजपा के खिलाफ संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा किसान विरोधी पार्टी है और चुनावों के दौरान लोगों में आपसी भाईचारा की सांझ को तोड़ने का प्रयास कर रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ऐसा नहीं होने देगी। केंद्र खिलाफ बाकी रहती किसानी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।
वोट मांगने आने वाली पार्टियों से लोग पूछें सवाल
किसान नेता हरभजन बूटर ने कहा कि गांवों में वोट मांगने आ रही पार्टियों के प्रत्याशियों से लोगों को सवाल पूछने चाहिए कि मत हासिल करने को वह झूठे दावे करते हैं। इसके बाद सत्ता हासिल करने पर लोगों को भूल जाते हैं। लोगों को अब जागरूक होना पड़ेगा, तभी पंजाब की राजनीति में बदलाव आएगा और लोगों का जीवन खुशहाल होगा।