पटियाला की चितकारा यूनिवर्सिटी में शनिवार को दीक्षांत समारोह मौके स्टूडेंट्स को सम्मानित करते राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी।
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राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि शिक्षण संस्थाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा देने पर ज्यादा जोर देना चाहिए। वह शनिवार को चितकारा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में एमबीए के सातवें बैच के स्टूडेंट्स के पासिंग आउट के मौके पर बोल रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि समय की जरूरत है कि शिक्षण संस्थाओं को औद्योगिक घरानों के साथ तालमेल कर उनकी जरूरत अनुसार स्टूडेंट्स को तकनीकी शिक्षा मुहैया करानी चाहिए, जिससे शिक्षा ग्रहण करने के बाद स्टूडेंट्स को जहां रोजगार के अवसर हासिल हो सकें। ऐसे कदम उठाने से ही स्वस्थ समाज का सृजन संभव हो सकता है।
सोलंकी ने कहा कि शिक्षा ही एक ऐसा साधन है, जो महान राष्ट्र के सृजन के लिए सहायक होता है। कोई भी राष्ट्र वहां के लोगों से जाना जाता है और लोग शिक्षा व सभ्याचार से जाने जाते हैं। जिस कारण शिक्षण संस्थाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह स्तरीय शिक्षा देने के साथ-साथ स्टूडेंट्स को नैतिक मूल्यों और इंसानियत के बहुमूल्य गुणों की भी शिक्षा दें।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजीटल इंडिया, स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया के सपने को साकार करने में स्टूडेंट्स वर्ग और शिक्षण संस्थाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं। इस मौके पर राज्यपाल ने फोर्टिस और रैलीगेयर कंपनी के वाइस चेयरमैन शिवेंद्र मोहन सिंह को आनरेरी डाक्टरेट की डिग्री के साथ सम्मानित किया। उन्हें यह सम्मान शिक्षा, बिजनेस और इंसानियत के प्रति अहम योगदान के लिए दिया गया। इस मौके पर चितकारा यूनिवर्सिटी के चांसलर डा. अशोक कुमार मौजूद रहे।