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मुख्यमंत्री सेहत योजना: निजी अस्पतालों की चिंताएं, 15 दिन में भुगतान अनिवार्य

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-बजट बढ़ाकर 2500 करोड़ करने की मांग, 1300 करोड़ का प्रावधान पर्याप्त नहीं
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना राज्य में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। योजना के तहत हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि पंजाब हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम एसोसिएशन ने योजना का स्वागत किया लेकिन साथ ही कुछ गंभीर चिंताएं भी जताई हैं। एसोसिएशन के मानद सचिव, डॉ. दिव्यांशु गुप्ता, ने कहा कि समझौते के अनुसार अस्पतालों को 15 दिनों के भीतर भुगतान किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि भुगतान में देरी होने पर अस्पताल संचालन और कर्मचारियों के वेतन पर असर पड़ेगा और अस्पतालों को लाभार्थियों का इलाज रोकने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
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डॉ. गुप्ता ने कहा कि योजना के सुचारू संचालन के लिए कम से कम 2500 करोड़ रुपये का बजट आवश्यक है, जबकि वर्तमान में केवल लगभग 1300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में योजना के तहत लगभग 70% आबादी कवर है और शेष 30% मरीजों से अस्पताल नकद भुगतान प्राप्त करते हैं। जब योजना 100% आबादी को कवर करेगी, तो अस्पताल पूरी तरह भुगतान पर निर्भर होंगे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि भविष्य में फंड खत्म हो जाए या बीमा कंपनी भुगतान में देरी करे, तो अस्पतालों के बकाया भुगतान की जिम्मेदारी किसकी होगी, इस पर स्पष्टता आवश्यक है। डॉ. गुप्ता ने सरकार से अनुरोध किया कि योजना के सफल क्रियान्वयन और मरीजों की सुविधा के लिए भुगतान तंत्र को मजबूत किया जाए और बजट बढ़ाया जाए।
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