बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका अरुंधति रॉय ने कहा कि आरएसएस कोई चुनी हुई संस्था न होकर भाजपा के जरिए सरकार को चला रही है। अब हर चीज आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर की ओर से चार दशक पहले बनाई योजनाओं के आधार पर चलाई जा रही है। लेफ्ट पार्टियों को विभिन्न दलित व अन्य दबे-कुचले समूहों के साथ अपने मतभेदों को कम करके आज के खतरे के विरुद्ध सांझी जद्दोजहद छेड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में देश में बड़ा बदलाव होने के आसार बने हुए हैं। वह रविवार को पटियाला में इंकलाबी लेखक सतनाम जंगलनामा को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थीं
अरुंधति ने कहा कि जब भी वह पंजाब आती थी तो वह हमेशा सतनाम जंगलनामा को मिलकर उनके साथ विचार चर्चा करती थीं। उन्होंने चिंता जताई कि सतनाम हमें उस समय छोड़कर चले गए जब जंगलों के आदिवासियों का हवाई फौज के जहाजों के जरिए शिकार खेला जा रहा है। सतनाम जंगलनामा ने 27 जुलाई की रात को अपनी जिंदगी का अंत कर लिया था। किसान लीडर डा. दर्शनपाल ने कहा कि साढ़े चार दशक में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां सतनाम ने काम नहीं किया। उन्होंने मजदूरों, मुलाजिमों, किसानों और बुद्धिजीवियों में काम किया। पीडीएफआई के लीडर अर्जुन प्रसाद सिंह पटना ने कहा कि सतनाम जंगल का गीत था, जो जद्दोजहद को सलाम करता था।