पटियाला से सांसद डा. धर्मवीर गांधी ने आम आदमी पार्टी की ओर से विधानसभा चुनावों के उम्मीदवारों के चयन के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। डा. गांधी ने शनिवार को यहां जारी बयान में कहा है कि 16 मेंबरी चुनाव प्रचार कमेटी जिसको पहले स्क्रीन कमेटी का नाम दिया गया था। इसमें से 14 मेंबर खुद विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। ऐसे में यह मेंबर जिस हलके से खुद चुनाव लड़ने की सोच रहे हैं, उस हलके से आई अन्य उम्मीदवारों के आवेदनों के साथ कैसे इंसाफ करेंगे। डा. गांधी ने कहा कि क्या वह ऐसे आवेदकों की अर्जियों को पांच मेंबरी कमेटी तक पहुंचने से रोकने की कोशिश नहीं करेंगे, जो आवेदक इन कमेटी मेंबरों से मेरिट के आधार पर ज्यादा योग्य होंगे।
गौरतलब है कि स्क्रीनिंग कमेटी के सभी सदस्य 16 मेंबरी कमेटी के भी मेंबर हैं। संजय सिंह पीएसी के भी मेंबर हैं। उम्मीदवारों के चयन का अधिकार पीएसी के पास है, जिसमें पंजाब का एक भी मेंबर शामिल नहीं है। इससे साफ होता है कि उम्मीदवारों के चुनाव का अधिकार पंजाब की लीडरशिप के हाथ नहीं, बल्कि केवल संजय सिंह व पीएसी के हाथ में है। डा. गांधी ने कहा कि एक महीने पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाल कर एक जमहूरी चुनाव प्रक्रिया का माडल पेश किया था। इसमें वालंटियरों का पूरा ध्यान रखा जा सकता था। लेकिन आप ने उनकी ओर से दिए सुझाव को नजरअंदाज करके पार्टी की बुनियादी विचारधारा को नकारा है। इसका खामियाजा पार्टी को 2017 के विधानसभा चुनावों में उठाना पड़ेगा। डा. गांधी ने कहा कि होना तो यह चाहिए कि चुनाव लड़ने का इच्छुक कोई भी लीडर किसी कमेटी का मेंबर न हो। उसको पहले ही अपने ओहदे से इस्तीफा दे देना चाहिए। एक निष्पक्ष स्क्रीनिंग कमेटी में से गुजर कर टिकट लेने के लिए चुनाव प्रक्रिया में से गुजरे।