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बारूद के ढेर पर शहर, दर्जनों लोग गवां चुके हैं जान

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बारूद का अवैध कारोबार, आखिर क्यों चुप है सरकार
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पुलिस प्रशासन की आंखों के सामने तैयार और स्टोर होते हैं पटाखे
बिना लाइसेंस रिहायशी इलाके में चल रही हैं अवैध पटाखा फैक्ट्रियां
12 लोग धमाकों की भेंट चढ़ चुके हैं और 12 से अधिक ने खोए अंग
अमर उजाला ब्यूरो
सुदेश तनेजा राजपुरा।
राजपुरा शहर बारूद के ढेर पर है। रविवार को रात अति व्यस्त मिर्च मंडी में धमाके से जहां पूरे इलाके में दहशत फैली। वहीं धमाके में बेकसूर कालोनी निवासी संजय कुमार को जान से हाथ धोना पड़ा। इसके अलावा आसपास रहने वाले पति-पत्नी व चार अन्य लोग जिंदगी और मौत के बीच अस्पतालों में जूझ रहे हैं। पहले भी इस मिर्च मंडी में 12 लोग धमाकों की भेंट चढ़ चुके हैं और 12 से अधिक दिव्यांग हो गए हैं।
पुलिस प्रशासन की आंखों के सामने शहर के कई इलाकों में लोगों ने लाखों रुपये के पटाखे स्टोर कर रखे हैं। पटियाला के डीसी के आदेशों के बाद भी कई स्थानों पर आतिशबाजी बनाने के कारखाने भी अवैध तौर पर धड़ल्ले से चल रहे हैं। शहर में विवाह समारोह, जन्मदिन, सालगिराह, दशहरा, दीपावली व गुरुपर्व के मद्देनजर राजपुरा की मिर्च मंडी में सैकड़ों टन विस्फोटक स्टोर हो जाता है। जिससे एक छोटी सी गलती हादसे का रूप धारण कर लेती है। पिछले कुछ वर्षों में धमाकों से लगी आग के चलते एक दर्जन से ज्यादा लोग जान गवां चुके हैं। जिससे प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिख। लगता है प्रशासन किसी बड़े हादसे की इंतजार में मौन धारण किए हुए है।
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मिर्च मंडी के कई घरों में सालों साल तैयार होते हैं पटाखे
हर वर्ष होली से लेकर 25 दिसंबर तक यहां पटाखे बनाने कार्य शुरू हो जाता है। पटाखा फैक्ट्रियां चलाने वाले शिवाकाशी, यूपी व अन्य शहरों से कारीगर लेकर आते हैं, जो वर्ष भर के लिए पटाखे स्टोर कर लेते हैं। शहर में पटाखा तैयार करने वाली ज्यादा फैक्ट्रियां मिर्च मंडी, महिंदरगंज, पुराना राजपुरा के अलावा शहर की नई कॉलोनियों में अवैध तौर पर पटाखे बनाने व स्टोर करने का धंधा करती हैं। इलाके में लगभग सभी फैक्टरी मालिकों व पटाखे स्टोर करने वालों के पास लाइसेंस तक नहीं है। वहीं नजदीकी रहने वाले अमनप्रीत सिंह, रमेश कुमार, सुशील शाही, विनोद सूद, जीवन मित्तल, सुभाष चंद, मेहर सिंह व अन्य का कहना है कि उनके घरों के पास ही पटाखा बनाने की फैक्ट्रियां हैं, जहां कई बार हादसे हो चुके हैं। उन्होंने पटाखा कारोबारियों को रिहायशी इलाकों से बाहर कारोबार करने की बात कही, ताकि बेकसूर लोग इनकी चपेट में आकर अपनी जिंदगी खतरे में न डाल सकें। उन्होंने इसकी शिकायत एसएसपी पटियाला व एसडीएम राजपुरा को भी करने की बात कही।

पटाखा तैयार करने वालों के पास नहीं लाइसेंस
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 40 वर्ष पहले मिर्च मंडी निवासी शमशुदीन, मेहरबान, मोहम्मद हन्नीफ, दयाराम, शाम सिंह, चंपा देवी, जगदीश चंद, फूल सिंह, अब्दुल वाहिद प्रशासन से लाइसेंस बनवाकर आतिशबाजी तैयार करने के साथ स्टोर करने का कार्य करते रहे हैं। उसके बाद करीब 30 साल पहले सरकार ने सभी लाइसेंस रिन्यू करने के लिए जमा करवा लिए थे। लेकिन 2005 के बाद उक्त लाइसेंस की फीस भरी गई और उन्हें शर्तों के आधार पर पटाखे तैयार व स्टोर करने की इजाजत मिली थी। जिसमें पटाखे बनाते समय गंधक, शोरा, सोडियम, कोयला व केमिकल मिलाकर पटाखों का मसाला तैयार किया जाता था। जिसका रिकार्ड डीएसपी सर्कल अफसर के पास था। लेकिन इस समय पटाखे तैयार करने वाले लोगों के पास न तो कोई अनुभव है और न ही लाइसेंस। इसके बावजूद लोग धड़ल्ले से पटाखे तैयार कर बेकसूर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।

संजय कुमार से पहले 12 की हो चुकी है मौत
राजपुरा की मिर्च मंडी में पटाखे तैयार करने व स्टोर करने का कारोबार चलता रहता है। इसी मिर्च मंडी में रविवार को रात संजय कुमार की दर्दनाक मौत से पहले करीब एक दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। बीते वर्षों में इसी कालोनी की कांता देवी, उसका बेटा तेजिंद्र कुमार, बहू शीतल, बेटी काजल, छोटा बेटा रिंकू व एक नौकर भी धमाकों के बाद मौत के आगोश में समां चुके हैं। इतना ही नहीं महावीर मार्केट के पास रहने वाले शंकर लाल और उनकी पत्नी की भी धमाके में में मौत हो चुकी है। थोड़े समय पहले एक 12 वर्षीय लड़की भी पटाखों की आग से जल चुकी है। इसके बावजूद शहर में धड़ल्ले से आतिशबाजी का काम जारी है
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मिर्च मंडी में घर-घर की तलाशी ली जा रही है : डीएसपी राजपुरा
डीएसपी कृष्ण कुमार पांथे का कहना है कि रविवार को देर रात हुए हादसे के बाद भारी पुलिस फोर्स के साथ सर्च अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए मिर्च मंडी में घर-घर की तलाशी ली जा रही है। पटाखे तैयार करने वालों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि वह रिहायशी कालोनी में गैर कानूनी कारोबार बंद कर दें। इतना ही नहीं पटाखे तैयार करने वालों के लाइसेंस चेक किए जा रहे हैं। मिर्च मंडी में स्टोर पटाखे भी पुलिस को कब्जे में लेने की बात कही है। ताकि फिर ऐसा हादसा न हो।
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