इराक से वापस लौटने वालों में धारीवाल के निकटवर्ती गांव कोट संतोख राए के दो युवक भी शामिल हैं। यहां के लवप्रीत सिंह पुत्र अजीत सिंह व गुरजिन्द्र सिंह पुत्र बलकार सिंह ने वापस लौट कर आपबीती सुनाई। उनके वापस लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि वे ईराक में फंसे पंजाबी नौजवानों के लिए भारत की एंबेंसी की ओर से किए जा रहे प्रयास नाकाफी हैं। उन्होंने इस बात को लेकर दुख जताया कि जो भी प्रयास हो रहे हैं, उससे वहां नौकरी करने वाले पंजाबियों का बकाया वेतन मारा जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनका तीन तीन माह का वेतन नहीं मिला है। खराब मौसम को देखते हुए वे बड़ी मुश्किल से भारत वापस लौटे हैं।
इसके लिए उन्हें खुद अपने स्तर से ज्यादा प्रयास करना पड़ा। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास के कर्मचारी नौजवानों से मिलकर केवल मोबाइल नंबर लेते हैं और उन्हें भारत वापस जाने के लिए कहते हैं। यदि कोई भारत नहीं जाना चाहता तो उससे स्वयं की जिम्मेदारी के लिए लिखित तौर पर जवाब मांगा जाता है। उन्होंने बताया कि सैकड़ों भारतीय नौजवान ऐसे हैं, जिनका वेतन संबंधित कंपनियों में फंसा हुआ है।
वेतन पाने के लिए उनकी ओर से भारतीय दूतावास के अधिकारियों से आग्रह करने का उन्हें कोई फायदा नहीं मिला। उन्होंने बताया कि आगामी कुछ दिनों में सारे भारतीय नौजवान वापस भारत आने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे दो वर्ष पूर्व नौकरी करने के लिए इराक गए थे।