वे कमाने के लिए घर से कर्ज लेकर इराक गए थे, पर हालात कुछ ऐसे बने की किसी प्रकार जान बचाकर उन्हें खाली हाथ वतन लौटना पड़ा। इराक से वापस आए क्षेत्र के दस युवकों ने सोमवार को अपना दर्द बयां किया।
उन्होंने अपनी कड़वी दास्तां सुनाई और कहा कि इराक की कंपनी में नौकरी के बावजूद उन्हें वेतन के नाम पर फूटी कोड़ी भी नहीं मिली। अब उन्होंने सरकार से माली सहायता करने में मदद के लिए गुहार लगाई है। हालांकि उनकी वापसी से परिजनों और ग्रामीणों में खुशी की लहर है।
गांव रोड खेहरा के रहने वाल शमशेर सिंह व हरप्रीत सिंह, काला अफगाना के कुलदीप सिंह, पन्नवां के सुलखन सिंह, जोड़ियां कलां के रशपाल सिंह, दरगाबाद के दिलबाग सिंह, मनोहरपुर के शमशेर सिंह, दरगाबाद के कंवलजीत सिंह, बलजीत सिंह व निर्मल सिंह ने बताया कि वे इराक के शहर करबला की कंपनी एएल बलदवई में काम करते थे। उनसे आठ घंटे तक काम लिया जाता था, उसके बदले में उन्हें कोई वेतन नहीं दिया गया।
उन्होंने बताया कि वह सभी गरीब परिवारों से हैं। एक-एक लाख रुपये का कर्ज उठाकर वह इराक गए थे, मगर वापसी के समय उन्हें कुछ नहीं मिला।
बंधक बनाकर रखे गए थे 450 भारतीय, होती थी मारपीट
उन्होंने इराक के खराब हालातों केे बारे में बताया कि कं पनी में काम करने वालों में लगभग 450 भारतीय थे। वहां हालात बेकाबू होने के बाद सभी को बंधक बनाकर रखा गया था। उनको खाना भी नहीं दिया जाता था। इतना ही नहीं उनके साथ मारपीट भी की जाती थी।
तक उन्होंने किसी प्रकार नेट पर एक वीडियो डाली थी, मगर अगले ही दिन कंपनी के सुरक्षा कर्मियों ने उनको हथियार दिखाकर धमकी देते हुए जबरदस्ती एक ओर वीडियो नेट पर अपलोड करवा दिया, जिसमें उनसे जबरन कहलवाया गया कि कंपनी बहुत बढ़िया है। बाद में एक दस्तावेज पर उनसे हस्ताक्षर करवा गया, जिस पर लिखा था कि कंपनी पर उनका कोई बकाया नहीं है। कंपनी ने उनके पासपोर्ट वापस करके शेष वेतन से उनकी टिकटें करवाकर वापस भारत के लिए जहाज में बैठा दिया।