शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एक्ट 1925 में संशोधन करने का अधिकार हरियाणा की राज्य सरकार को नहीं है। यदि राज्य सरकार ऐसा कुछ करती है तो यह पूरी तरह से असंवैधानिक होगा। मुख्यमंत्री भुपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा हरियाणा के लिए अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने की घोषणा करना पूरी तरह गैरजिम्मेदाराना बयान है। यह विचार पूर्व मंत्री व शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता सेवा सिंह सेखवां के हैं।
उन्होंने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी एक्ट सिख कौम द्वारा दी गई बड़ी कुर्बानियों के बाद अस्तित्व में आई है। इस एक्ट में केन्द्र सरकार द्वारा संशोधन के लिए विचार तभी किया जा सकता है जब शिरोमणि कमेटी के चुने गए सदस्य तीन तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करें। उन्होंने कहा कि हुड्डा यह भलीभांति जानकारी रखते हैं कि संवैधानिक तौर पर हरियाणा की अलग कमेटी का गठन नहीं किया जा सकता। यह विधानसभा चुनाव को देखते हुए उनकी ओर से छोड़ा गया सिगूफा है।
हुड्डा द्वारा हरियाणा के पिछले विधान सभा चुनाव के समय अपने चुनावी घोषणा पत्र में अलग एसजीपीसी के गठन का मुद्दा शामिल किया गया था, लेकिन उस समय देश के प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह ने दखल देकर हुड्डा को रोक दिया था। डा.मनमोहन सिंह ने उस समय कहा था कि गुरुद्वारा एक्ट 1925 बनाने के लिए गिरफ्तारियां तक दी गईं।
सेखवां ने कहा कि सिख कौम अमन शांति व भाईचारे की भावना को मजबूत बनाने के लिए हमेशा तत्पर रही है, लेकिन सिखों के धार्मिक मामलों में बाहरी दखलअंदाजी को कभी सहन नहीं किया जा सकता।
पंडित नेहरू ने भी कहा था कि कांग्रेस सिखों के धार्मिक मामलों में कभी दलखअंदाजी नहीं करेगी। इसलिए सोनिया व राहुल गांधी को अपने पुरखों की बात नहीं भूलनी चाहिए। शिरोमणि अकाली दल तथा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से हुड्डा के इस मंसूबे को कभी पूरा नहीं होने दिया जाएगा।