प्रदेश में भूगर्भीय जल स्तर में जारी गिरावट को नियंत्रित करनेे लिए अब कृषि विभाग की पहल पर धान और बासमती की बिजाई के तरीके में बदलाव की शुरुआत की गई है। इसके तहत अब बासमती चावल की फसल के लिए सीधी बिजाई का तरीका अपनाया जा रहा है।
कृषि विभाग की ओर से जिले के गांव शामपुरा में कैंप का आयोजन कर बिजाई की शुरुआत की गई। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बासमती के फसल की सीधी बिजाई के तरीके से फसल की लागत में भी कमी आएगी।
कैंप में शामपुरा के किसान रंजीत सिंह और बिक्रमजीत सिंह के 45 एकड़ क्षेत्र में बासमती 1121 की सीधी बिजाई की गई। यहां मौजूद कृषि अधिकारियों ने कहा कि विभाग एक अभियान के तहत किसानों को जागरूक कर रहा है। इस अभियान का श्रीगणेश शामपुरा गांव से हुआ है।
इस कैंप में मुख्य खेतीबाड़ी अधिकारी गुरदासपुर डॉ. रवि कुमार सभरवाल, डॉ. अमरीक सिंह, डॉ. अजैब सिंह, डॉ. दिनेश कुमार, नवदीप कौर आदि ने शिरकत की। डॉ. रवि कुमार सभरवाल ने किसानों को धान की बिजाई के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि भूगर्भीय जल स्तर की गिरावट को रोकने के लिए जरूरी है कि धान की बिजाई बढ़े पैमाने पर की जाए, ताकि जमीन के नीचे का पानी के स्तर को ओर नीचे जाने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि सीधी धान की बिजाई से किसानों को फसल की लागत में प्रति एकड़ दो से तीन हजार रुपये की बचत हो सकती है।
पंद्रह जून से पहले बिजाई की तो जुर्माना
इस दौरान डॉ. अजैब सिंह और डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा पंजाब प्रिजर्वेशन आफ सब साइल वाटर एक्ट 2009 में संशोधिन किया गया है। इसके तहत पुरानी नर्सरी विधि से धान की काश्त 15 जून से पहले और बासमती की बिजाई पांच जुलाई से पहले करने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। उन्होंने बताया कि जो किसान 15 जून से पहले धान और पांच जुलाई से पहले बासमती की बिजाई करेगा, उससे 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर जुर्माना वसूला जाएगा।
क्या है सीधी बिजाई
सीधी बिजाई का तरीका ड्रेल मशीन की सहायता से अपनाया जाता है। इसमें बीज की नर्सरी तैयार करने की जरूरत नहीं होती। इतना ही नहीं इसकी बिजाई के दौरान खेत को पानी से भरने की जरूरत नहीं होती। हालांकि नर्सरी विधि से बिजाई के लिए पहलेे बीज की नर्सरी तैयार की जाती है। इसके बाद खेत को पानी से भरकर फसल की बिजाई की जाती है। इसमें काफी मात्रा में पानी का उपयोग होता है।