पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार की ओर से शनिवार को सभी वर्गों के लिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का एलान किए जाने के साथ ही अब आम लोगों की नजरें दूसरी सबसे बड़ी गारंटी, 18 साल से अधिक उम्र की लड़कियों और महिलाओं को हर माह 1000 रुपये की राशि देने पर टिक गई है।
माना जा रहा है कि मान सरकार के लिए यह गारंटी इसी साल लागू करना जरूरी हो गया है, क्योंकि पार्टी नवंबर में हिमाचल में होने वाले विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। ऐसे में पंजाब की महिलाओं को घर बैठे 1000 रुपये दिया जाना, पार्टी को हिमाचल की महिला मतदाताओं को रिझाने में तुरुप का पत्ता साबित होगा।
उल्लेखनीय है कि भगवंत मान सरकार आगामी जून माह में 2022-23 के लिए वार्षिक बजट पेश करेगी, जिसमें 300 यूनिट मुफ्त बिजली के लिए पैसे की व्यवस्था का लेखा-जोखा भी देना होगा। फिलहाल पंजाब सरकार बिजली सब्सिडी के रूप में लगभग 4000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जिसमें 300 यूनिट मुफ्त बिजली के लिए करीब 5000 करोड़ रुपये और जोड़ने होंगे।
इसी तरह, बजट में अगर राज्य सरकार महिलाओं को 1000 रुपये मासिक देने की योजना के लिए पैसे की व्यवस्था करना चाहेगी तो उसे 18 साल से अधिक उम्र की 1020099 महिलाओं (महिला मतदाताओं की ताजा संख्या) के लिए हर माह एक अरब दो करोड़ 99000 रुपये की और एक साल में लगभग 1225 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी होगी।
दूसरी ओर करीब 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे पंजाब की पिछली सरकार ने अपने अंतिम वर्ष में 24000 करोड़ रुपये के घाटे का बजट पेश किया था। ऐसे में बिजली सब्सिडी के करीब 10000 करोड़ और महिलाओं को 1000 रुपये की योजना के 1225 करोड़ रुपये राज्य सरकार पर नया और बहुत बड़ा बोझ साबित होंगे।
आम आदमी पार्टी ने चुनाव पूर्व जनता से किए अन्य वादों में, कच्चे मुलाजिमों को नियमित करने, आशा व आंगनबाड़ी वर्करों को आर्थिक रूप से मुआवजा देने जैसे वादे भी किए हुए हैं, जिनके लिए एक बड़ी राशि की जरूरत होगी। फिलहाल अवैध खनन रोककर, शराब माफिया पर शिकंजा कसकर राजस्व बढ़ाने की जो बात कही जा रही थी, उस दिशा में मान सरकार कोई बड़ा कदम नहीं उठा सकी है।
सरकारी मुलाजिमों को लगातार बढ़ता वेतन और पेंशन के बोझ के अलावा राज्य पर बढ़ता कर्ज और ब्याज सरकार के लिए विकास की योजनाओं में बड़ी बाधा साबित होगा। आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च को पंजाब का कुल बकाया कर्ज 252880 करोड़ रुपये था, जो 2020-21 के लिए जीएसडीपी का 42 प्रतिशत है। वहीं 2021-22 में यह बकाया कर्ज 273703 करोड़ रुपये होने की संभावना है, जो जीएसडीपी का 45 प्रतिशत हो जाएगा। वर्तमान में राज्य के वार्षिक बजट का 20 फीसदी हिस्सा कर्ज और उसका ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है, जबकि राज्य सरकार इस साल नए बजट में शिक्षा का बजट बढ़ाने के संकेत अभी से दे रही है।