जीरकपुर। तेजाबी हमले को लेकर बनी फिल्म छपाक को देखकर पंजाब की पीड़िताओं के आंसू छलक पड़े। कैबिनेट मंत्री अरुणा चौधरी ने उन्हें चुप कराया। फिल्म देखकर निकलीं पीड़िताओं ने इतना ही कहा कि इस दर्द को वही जान सकता है, जिसने इसे झेला हो। दीपिका ने इस दर्द को परदे पर शानदार तरीके से उभारा है।
पंजाब सरकार की ओर से शनिवार को छपाक का विशेष शो तेजाब हमले की पीड़िताओं के लिए रखा था। जीरकपुर के ढिल्लों प्लाजा में सामाजिक सुरक्षा, महिला और बाल विकास विभाग की मंत्री अरुणा चौधरी के साथ 15 पीड़िताओं ने यह फिल्म देखी।
छपाक में दीपिका पादुकोण लक्ष्मी अग्रवाल की असल जिंदगी को जी रही हैं। सच्ची घटना पर आधारित यह फिल्म तेजाब पीड़िताओं के संघर्ष की कहानी है। फिल्म शुरू से लेकर अंत तक कैबिनेट मंत्री अरुणा चौधरी पीड़िताओं का दर्द बांटती नजर आईं और जब किसी पीड़िता की आंखों से आंसू बहते तो अरुणा गले लगाकर चुप करातीं। एक पीड़िता तो फिल्म खत्म होने के बाद दहाड़ें मारकर रोने लगी। अरुणा ने उसे सांत्वना देकर चुप कराया।
अरुणा चौधरी ने बताया कि यह एक ऐसी सच्चाई है, जो आपको हिला देती है। 19 साल की लक्ष्मी अग्रवाल पर हुए तेजाबी हमले की सच्ची कहानी है। फिल्म में मालती बनीं दीपिका पर तेजाब फेंककर उसका चेहरा जला दिया जाता है। फिल्म देखकर तेजाब पीड़िताओं का दर्द सब महसूस कर सकेंगे। अरुणा चौधरी ने कहा कि वह उन पीड़िताओं के जज्बे को सलाम करती हैं, जो मुश्किलों के बावजूद बहादुरी और दिलेरी से आगे बढ़ रही हैं।
पंजाब में तेजाबी हमले की 40 पीड़िताएं
अरुणा चौधरी ने बताया कि पंजाब में तेजाबी हमले के 40 केस दर्ज हैं। इनमें से 11 में आरोपियों को सजा हो मिल चुकी है। जबकि इस हमले में दिव्यांग हो चुके पीड़ितों को सामाजिक सुरक्षा विभाग की तरफ से 750 रुपये महीना पेंशन और सोशल सिक्योरिटी स्कीम तहत 8 हजार को मिलाकर कुल 8,750 रुपये दिए जा रहे हैं। गृह विभाग की मौजूदा नीति के अनुसार, पीड़ित को 3 लाख रुपये मुआवजे का भी प्रावधान है। इस मौके विभाग की प्रमुख सचिव राजी पी श्रीवास्तवा, डायरेक्टर गुरप्रीत कौर सपरा, चेयरमैन प्लानिंग बोर्ड बरनाला करनइंदर सिंह ढिल्लों, एडीजीपी गुरप्रीत दियो, आईजी विभू राज, अतिरिक्त डायरेक्टर लीली चौधरी और डिप्टी डायरेक्टर हरपाल सिंह उपस्थित थे।