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मोहाली में पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट में विजिलेंस ने दी दबिश

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मोहाली। सेक्टर-88 स्थित पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट प्रोजेक्ट पर विजिलेंस की आंख लग गई है। बुधवार को विजिलेंस की टीम ने पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट में दबिश दी। इस दौरान डीएसपी की अगुवाई में टीम पहुंची थी। टीम ने प्रोजेक्ट से जुड़े कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। साथ ही कुछ दस्तावेज गमाडा से मंगवाए गए हैं। इस दौरान गमाडा के अधिकारी व विजिलेंस को शिकायत करने वाले लोग भी मौजूद रहे। टीम के अधिकारियों ने कुछ भी न बोलते हुए कहा कि मामले की जांच चल रही है। सारा रिकॉर्ड चेक किया जा रहा है। अगर खामियां सामने आती हैं तो विजिलेंस द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
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जानकारी के मुताबिक करीब दो साल पहले जब राज्य में कांग्रेस सरकार सत्ता में आई थी तो उस दौरन पूरब प्रीमियम फ्लैटों के अलॉटियों ने आरोप लगाए थे कि गमाडा ने उसके धोखा किया है। उनसे स्कीम निकालते समय जो वायदे किए गए थे, वे पूरे नहीं किए गए। यहां तक कि बिल्डिंग का डिजाइन तक बदल दिया गया था। यहां तक कि इस प्रोजेक्ट के समय गमाडा के चीफ इंजीनियर एसपी सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। विजिलेंस को की गई शिकायत में कहा गया था कि प्रोजेक्ट की लागत 715 करोड़ रुपये के करीब थी जबकि प्रोजेक्ट में काम करने वाली कंपनियों को 750 करोड़ रुपये जारी किए गए। इसके अलावा शिकायत में उन्होंने 52 प्वाइंट गिनाए थे जो उन्होंने प्रोजेक्ट में खामियां बताई थीं। इसके बाद अब इस दिशा में कार्रवाई शुरू हुई है।
सूत्रों के मुताबिक विजिलेंस की टीम बुधवार को सुबह ही पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट में पहुंच गई थी। इसके बाद गमाडा के हार्टिकल्चर, सिविल, इलेक्ट्रिक समेत कई विभागों के अधिकारियों से इस संबंधी पड़ताल की। वहीं पूरब प्रीमियम रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव कर्नल दलविंदर सिंह, फाइनांस सेक्रेटरी परविंदर सिंह, सेक्रेटरी केसर सिंह, मेंबर धर्म सिंह और गुरप्रीत बराड़ भी हाजिर रहे।
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सीएम से लेकर पीएम तक लोग कर चुके हैं शिकायत
जानकारी के मुताबिक पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट गमाडा के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों में से एक है। इसमें पहली बार बहुमंजिला फ्लैट बनाए गए थे। प्रोजेक्ट में वन बीचएके, टू बीएचके व थ्री बीएचके फ्लैट थे। प्रोजेक्ट में मुंबई की कंपनी को कंसल्टेंट रखा गया था। फ्लैटों में कई तरह की सुविधाएं देने का वायदा किया गया था लेकिन पहले प्रोजेक्ट के पजेशन देने में देरी हुई। इसके बाद भी कई खामियां सामने आईं। लोगों ने इस बारे में सीएम से लेकर पीएम तक पत्र लिखे। इसके बाद जिला प्रशासन व गमाडा हरकत में आया। साथ ही कई खामियों को सुधारा भी गया था।
काफी फ्लैट लोग कर चुके सरेंडर, सरकारी रिहायश बनाने की चल रही कवायद
जानकारी के मुताबिक गमाडा ने उक्त प्रोजेक्ट 2013 में लांच किया था। प्रोजेक्ट पर करीब 715 करोड़ रुपये की लागत आई थी। इस दौरान अलॉटियों को फ्लैटों के पजेशन 2017 में दिए गए थे। इस समय करीब 500 परिवार वहां पर रह रहे थे। काफी फ्लैट लोग सरेंडर कर चुके हैं। पहले गमाडा ने यह फ्लैट सरकारी कंपनियों व बैंकों के मुलाजिमों को भी अलॉट करने की योजना बनाई थी जो सिरे नहीं चढ़ पाई थी। वहीं, अब डीसी ऑफिस के सरकारी मुुलाजिमों को सरकारी रिहायश देने के लिए इनका प्रयोग किया जाना है जिसके लिए कवायद चल रही है।
एयरपोर्ट रोड की हो चुकी विजिलेंस जांच, कुराली में डाले सीवरेज की भी जांच की उठ रही मांग
जानकारी के मुताबिक शहर में इससे पहले गमाडा द्वारा बनाई गई एयरपोर्ट रोड की भी विजिलेंस जांच हुई थी। इसमें कई तकनीकी खामियां सामने आई थी। इसके बाद गमाडा के तत्कालीन चीफ इंजीनियर एसपी सिंह पर केस दर्ज हुआ था। इसके अलावा कुुराली में गमाडा द्वारा डाले गए सीवरेज सिस्टम की जांच की मांग उठ रही है।
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