मोहाली। प्राइवेट स्कूलों में पहली से 10वीं क्लास तक पंजाबी सब्जेक्ट को कंप्लसरी कर तय मानकों के अनुसार शिक्षा दिए जाने की मांग को लेकर पंजाबी भाषा प्रसार भाईचारे के एक वफद ने एक मांग पत्र शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार को दिया। वफद का कहना था कि पंजाब-पंजाबी व अन्य भाषा जानकारी एक्ट 2008 की व्यवस्थाओं को लागू करने के सरकार के आदेशों पर बहुत से स्कूलों ने अमल नहीं किया है।
प्राइवेट स्कूलों में पहली से 10वीं क्लास तक के लिए पंजाबी कंप्लसरी करने की मांग को लेकर शिक्षा सचिव से मिले वफद में संगठन के सहायक संचालक मित्र सेन मीत, हरबख्श सिंह ग्रेवाल, इंद्रपाल सिंह, सुखजिंदर पाल सिंह सिद्धू, कनाडा इकाई के संचालक दविंदर सिंह घटौड़ा व मोहाली इकाई के संचालक गुरप्रीत सिंह निमानिआं शामिल थे। वफद ने शिक्षा सचिव को जहां संगठन के कामकाज से अवगत करवाया। वहीं पंजाबी को सभी स्कूलों में लागू न किए जाने की बात रखी।
प्राइवेट स्कूलों में पंजाबी के पाठ्यक्रम का स्तर बेहतर नहीं
वफद ने मांग उठाई कि सभी प्राइवेट स्कूलों में पंजाबी को कंप्लसरी करने के लिए सरकार के इन आदेशों को लागू करवाया जाए। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को जरूरी हिदायतें जारी करके प्राइवेट स्कूलों में सख्ती से इसका पालन करवाया जाए। वफद ने यह भी कहा कि जिन प्राइवेट स्कूलों में पंजाबी पढ़ाई भी जा रही है, उनका पाठ्यक्रम बेहतर स्तर का नहीं है। लिहाजा एक जैसा उच्च स्तरीय पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए शिक्षा विभाग प्रयास करे। प्राइवेट स्कूलों के पाठ्यक्रम में पंजाबी भाषा की त्रुटियों को सुधारने व किताबों का बेहतर संपादन करने के लिए भी काम किए जाने की जरूरत पर जोर दिया। इस मौके पर शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार ने वफद को कहा कि वह इस ओर खास ध्यान देंगे और पंजाबी भाषा को सख्ती से लागू करवाने के लिए गंभीरता से प्रयास करेंगे। उन्होंने पंजाबी की पाठ्य पुस्तकों में जरूरी संशोधन करवाने की बात भी कही।
आरटीआई से पता चला- हर जिले में दो-तीन सीबीएसई स्कूल ही पंजाबी पढ़ा रहे
वफद ने शिक्षा सचिव से उस आरटीआई का खास तौर पर जिक्र किया गया, जिसके जरिए हरबख्श सिंह ग्रेवाल ने जानकारी प्राइवेट स्कूलों में पंजाबी पढ़ाए जाने की जानकारी मांगी थी। आरटीआई के जवाब में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों ने अपने जिले के दो से तीन सीबीएसई स्कूलों के नाम दिए थे, जहां पंजाबी को विषय के तौर पर पढ़ाए जाने की बात कही गई थी। ग्रेवाल का कहना था कि अकेले लुधियाना में ही करीब 1800 प्राइवेट स्कूल हैं, जबकि पंजाबी महज कुछेक स्कूलों में ही पढ़ाई जा रही है।