जीरकपुर। बलटाना के सैनी विहार फेस 3 निवासी रिया यूक्रेन से शनिवार को अपने घर पहुंची है। परिवार में खुशी की लहर है। 20 वर्षीय रिया ने बताया कि वह दो साल पहले यूक्रेन में एमबीबीएस के लिए गई थीं, लेकिन यूक्रेन और रूस की जंग ने उनका कैरियर व जिंदगी खतरे में डाल दी है।
अब उनको यही चिंता सता रही है कि आगे क्या होगा। क्या उनके मेहनत के दो साल बर्बाद होने से बच जाएंगे। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से मदद की गुहार भी लगाई है। रिया ने बताया कि वह पोलतावा शहर की यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं। उनके साथ बहुत सारे भारतीय छात्र भी थे। 23 फरवरी से वह डर के साए में जी रहे हैं। उनके होस्टल से कुछ ही दूरी पर धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही थीं, जिससे पूरा होस्टल सहम जाता था। 23 फरवरी के बाद उन्हें बंकरों में रहने के आदेश दिए थे और लाइटें भी नहीं जलाने दी जाती थीं।
रिया ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने साफ साफ बोल दिया था कि अगर वह वापस जाना चाहते हैं तो अपने जोखिम पर ही जाना पड़ेगा। इसके बाद करीब 50 छात्रों ने एक बस किराए पर की और 1050 किलोमीटर का सफर तय कर हंगरी बार्डर पर पड़ते ओजरोत में एक होस्टल में पहुंचे।
ओजरोत के चोप रेलवे स्टेशन पर हुई गुम
रिया ने बताया कि वह उस समय ज्यादा भयभीत हुई, जब वह ओजरोत के चोप रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो वह अपने ग्रुप से अलग हो गई। इसके करीब एक घंटे बाद एक जानकार छात्र गोविंद मिला और उसने मुझे अपने ग्रुप से मिलाया। जहां से वह 100 किलोमीटर दूर हंगरी में पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद इंडियन एंबेसी ने उनकी सहायता की। उन्हें खाने के लिए जूस, ब्रेड, सूप, फ्रूट, सेनेटाइजर सोप और रहने के लिए अच्छी सुविधा का इंतजाम किया। जहां रात ठहरने के बाद वह अगले दिन इंडिगो फ्लाइट से भारत लौट आए। दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचकर परिवार से मिलने के बाद असल राहत महसूस हुई।
मां बोली- यहां सस्ती होती पढ़ाई तो कभी नहीं भेजते विदेश
रिया के मां रेनू ने बताया कि उनकी बेटी ने चंडीगढ़ 21 सेक्टर देव समाज में पढ़ाई करते समय मेडिकल में टॉप किया था। इसके बाद हमने उन्हें एमबीबीएस करवाने का सोचा तो यहां नार्थ इंडिया में मेडिकल कॉलेजों में खर्च पता किया तो बजट एक करोड़ से ऊपर जा रहा था। इस कारण बेटी को यूक्रेन भेजना पड़ा। मां ने बताया कि इंडिया में पढ़ाई का खर्च चार गुना है यदि भारत मे पढ़ाई सस्ती होती तो बच्चों को विदेश न भेजना पड़ता। उन्होंने केंद्र सरकार से वहां फंसे बच्चों को बचाने और भारत में पढ़ाई सस्ती करवाने की अपील की।