मोहाली। साहित्य के प्रति प्रेम को समर्पित पीढ़ियां दुर्लभ ही देखने का मिलती हैं। एक ऐसे ही साहित्य प्रेम की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई, जब लोक-कवि ज्ञानी ईशर सिंह ‘दर्द’ ने श्रेष्ठ क्रांतिकारी कविताएं लिखनी शुरू कीं। फिर इस विरासत की कमान संभाली उनके बड़े बेटे पंजाबी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक एवं साहित्य अकादमी अवॉर्ड विजेता शिरोमणि साहित्यकार संतोख सिंह धीर ने। अब तीन पीढ़ियों की नव-प्रकाशित पुस्तकों का एक साथ प्रकाशन होना साहित्य जगत में एक अनूठी मिसाल है।
संतोख सिंह धीर के नक्शे कदम पर चलते हुए उनके बेटे एडवोकेट रिपुदमन सिंह ने न केवल अपनी रचनाओं के जरिए पंजाबी साहित्य में सम्मान हासिल किया है। बल्कि अगली पीढ़ियों को भी साहित्य के सफर में शामिल किया है। रिपुदमन सिंह के बड़े बेटे संजीवन सिंह एक स्थापित नाटककार एवं निर्देशक हैं। उनके छोटे बेटे रंजीवन सिंह पेशे से वकील हैं। इसके साथ ही वे एक चर्चित कहानीकार एवं कवि भी हैं। वहीं 5वीं पीढ़ी के तौर पर साहित्य से जुड़े होने की शुरुआत रिपुदमन सिंह की पोती एडवोकेट रितू राग ने अंग्रेजी की कविताएं लिखकर की, जो उन्हें आधुनिक समय की लेखिका का दर्जा देती हैं। वहीं रिपुदमन सिंह का पोता लॉ स्टूडेंट रेशम राग सिंह भी पंजाबी गीतकारी में उभरता नाम है।
आने वाली किताब ‘पोहू फूटाले तक’ में लिखीं 11 कहानियां
87 वर्षीय एडवोकेट रिपुदमन सिंह इस उम्र में भी जिंदादिली और शिद्दत से सामाजिक सरोकारों पर साहित्य रचने में मशरूफ हैं। वे अपने काव्य संग्रह रानी रुत और लालगढ़, कहानी संग्रह दिल दी अग्ग, बहाने बहाने, ओपरी हवा और बदमाश, जैसे निबंध संग्रह एवं संपादक के रूप में पिता ज्ञानी ईशर सिंह दर्द की ओर से रचित कविताओं के संग्रह के जरिए साहित्य जगत में अपना उच्च मुकाम हासिल कर चुके हैं। पंजाबी साहित्य प्रेम को वे तीसरी पीढ़ी तक पहुंचने में कामयाब हुए। जिसके एवज में उनके दोनों बेटे साहित्य के साथ क्रांतिकारी सोच से भी जुड़े। उन्होंने अपनी आने वाली किताब ‘पोह फूटाले तक’ में 11 कहानियां लिखी हैं, जो आपसी रिश्तों के ताने-बाने और मौजूदा समय की शिक्षा और गिरते राजनीतिक स्तर से संबंधित हैं।
सामाजिक मुद्दों पर लिखे पंजाबी नाटक, देश-विदेश में मंचित
इप्टा पंजाब और सरघी कला केंद्र मोहाली के अध्यक्ष संजीवन सिंह ने 1990 के दशक मेें सामाजिक मुद्दों पर पंजाबी नाटक लिखे और देश विदेश में मंचित करते आ रहे हैं। उनकी ओर से रचित और मंचित लगभग दो दर्जन नाटकों का प्रकाशन हो चुका है। फ्रीडम फाइटर के लिए उन्हें गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी की ओर से आईसी नंदा अवॉर्ड भी प्रदान किया गया। उनके नाटक दफ्तर पर प्रसिद्ध म्यूजिक कंपनी सा रे गा मा एचएमवी द्वारा वीसीडी फिल्म बनाई जा चुकी है। ऐसे में वे अपनी किताब दफ्तर में जो उन्होंने व्यंग्यात्मक नाटक के रूप में लिखा है, जिसमें एक सरकारी दफ्तर में होने वाले घोटालों, आम आदमी का शोषण और उच्च अधिकारियों की चापलूसी, जिसके अंत में एक उन कर्मचारियों के दशा बताई गई है, जो अंत में दोषी बनाए जाते हैं।
रीतू की कविताओं में 16 से 26 तक की उम्र के अनुभव
विरासत में पंजाबी साहित्य से जुड़ी चौथी पीढ़ी की युवा कवि रीतू राग, एक अदाकारा और चित्रकार भी है। वह अपने बड़ों के मार्गदर्शन पर चलते हुए पहली अंग्रेजी काव्य संग्रह ‘यू एंड आई’ के जरिए साहित्य जगत में कदम रख रही हैं। ऐसे में रीतू राग ने बताया कि उनकी किताब ‘यू एंड आई’ में 30 काव्य संग्रह हैं। पहली कविता 2010 में लिखी थी और सबसे नई कविता उन्होंने लॉकडाउन में लिखी है। उन्होंने बताया कि इन कविताओं में उनका 16 से 26 तक की उम्र का अनुभव है। कोई भी इन कविताओं को अपने जीवन से जोड़कर देख सकता है। रीतू ने बताया कि मेरी कविता के अंत में एक नई उम्मीद और सकारात्मक जिंदगी को देखने का नजरिया मिलता है। अभी यह कहना मुश्किल है कि में एक लेखिका अच्छी हूं या वकील। क्योंकि अभी यह एक शुरुआत है। लेकिन साहित्य से जुड़े रहने का वादा कर सकती हूं।