मोहाली। फेज-6 के डॉ. बीआर अंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में बन रहा नया पीडियाट्रिक वार्ड लंबे समय से अधर में लटका हुआ है। पहले कहा गया था कि यह वार्ड 26 जनवरी तक बनकर तैयार हो जाएगा, फिर 10 मार्च की तारीख दी गई। जून भी बीतने वाला है और काम अब तक अधूरा है। इस देरी का खामियाजा उन बच्चों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है, जो गंभीर स्थिति में अस्पताल आते हैं और बेड न मिलने पर इधर-उधर भटकते हैं या लंबा इंतजार करते हैं। यहां 200 के करीब बच्चे देखे जाते हैं। एडमिशन की जरूरत पड़ने पर टालमटोल किया जा रहा है।
न मौजूद बेड पूरे, न व्यवस्था सुचारु
अभी अस्पताल में बच्चों के लिए 40 बेड की सुविधा है, लेकिन सभी बेड एक जगह मौजूद नहीं हैं। कई बार बच्चों को एडल्ट मरीजों के साथ रखा जाता है, जिससे बच्चों को संक्रमण का खतरा और नर्सिंग स्टाफ को देखरेख में दिक्कत होती है।
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नए पीडियाट्रिक वार्ड में 12 बेड और जोड़े जा रहे हैं, जिनमें से 5 बेड आईसीयू के लिए आरक्षित होंगे। इससे स्थिति कुछ हद तक सुधर सकती है – बशर्ते वार्ड समय पर शुरू हो जाए।
छह महीने धीमी गति से चल रहा काम
निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों ने पहले 26 जनवरी की डेडलाइन दी थी, लेकिन मजदूरों की अनुपलब्धता और संसाधनों की कमी के चलते बार-बार काम टलता रहा।
क्या कहतें है अधिकारी
नया पीडियाट्रिक वार्ड शुरू होने में अभी वक्त लगेगा क्योंकि केंद्र सरकार से अभी फंड आना है उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। - प्रो भवनीत भारती, डायरेक्टर एम्स