बहुचर्चित मोगा सैक्स स्कैंडल केस की सुनवाई सोमवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में हुई। सीबीआई ने इस मामले मेें जस्टिस जुवेनाइल बोर्ड के कोर्ट ऑर्डर को चैलेंज करते हुए सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में रिवीजन पिटीशन फाइल की है।सीबीआई ने याचिका में कहा कि वर्ष 2007 में जो मोगा सैक्स स्कैंडल हुआ थाए उसमें नाबालिग लड़की को सीबीआई ने अपना गवाह बनाया था। लड़की नाबालिग होने के चलते इस मामले से जुड़ा एक केस जुवेनाइल कोर्ट में भी विचाराधीन है। वह नाबालिग लड़की अपने बयानों से मुकर गई थी। 30 जनवरी को जुवेनाइल कोर्ट मोहाली ने सीआरपीसी 313 के तहत एवीडेंस क्लोज कर दिया। सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर की है कि यह साक्ष्य बंद नहीं होना चाहिए। सीबीआई ने अपने ग्राउंड में कहा कि इस केस में उनके आईओ की गवाही नहीं हुई, जो आरोपी लड़की है वह नाबालिग होने का फायदा उठा सकती है। अदालत को बताया कि आरोपी नाबालिग लड़की जो फायदा लेना चाहती है उससे मुख्य केस में असर पड़ सकता है। वहीं, दूसरी तरफ आरोपी लड़की के वकील रणजोध सिंह सराओ ने सीबीआई की याचिका के खिलाफ जवाब दाखिल किया है। उन्होंने सीबीआई के दावे को चैलेंज किया है। इस मामले की सुनवाई 18 मार्च को रखी गई है।
गौरतलब है कि पुलिस के आला अधिकारियों व एक राजनेता के बेटे की संलिप्तता वाला यह मोगा सैक्स स्कैंडल केस वर्ष 2007 में सामने आया था। जबकि केस में पीड़ित मोगा के धनाढ्य लोग थे, जिन्हें एक स्थानीय महिला की मदद से पुलिस के आला अधिकारियों की ओर से ब्लैकमेल किया जाता था। महिला मोगा के अमीर व्यापारियों पर उसका शारीरिक तौर पर शोषण करने के आरोप लगाती थी और मामले में शामिल पुलिस अधिकारी इन शिकायतों को निपटाने के एवज में पीड़ित व्यापारियों से मोटी रकम वसूलते थे। यह सैक्स स्कैंडल उस समय सामने आया, जब कुछ पीड़ितों ने पुलिस के आला अफसरों के पास अपना दुखड़ा बयां किया। मोगा के कुछ सीनियर पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता के कारण पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस केस को दिसंबर 2007 में सीबीआई को जांच के लिए सौंप दिया था।