मोहाली। निचली अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में सुनील कुमार उर्फ सोनू उर्फ विशाल को दोषी ठहराकर धारा 419 में तीन साल की कैद और धारा 420 व 511 में दो साल कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ दोषी सुनील कुमार ने अतिरिक्त जिला सैशन कोर्ट में लगाए आरोपों से बरी करने की याचिका दायर की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनील कुमार को बरी कर दिया। अदालत ने फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूरी तरह विफल रहा है। अदालत ने सुनील कुमार को उसके खिलाफ लगे आरोपों से बरी किया और उसे 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने निर्णय की प्रति सहित ट्रायल कोर्ट की फाइल वापस करने और अपील की फाइल रिकॉर्ड रूम भेजने के निर्देश दिए।
11 सितंबर 2014 को एएसआई पलविंदर सिंह पुलिस स्टेशन में मौजूद थे। उन्हें एमएचसी ने सूचित किया कि तहसील कार्यालय में कुछ लोगों को पकड़ा गया है। इसके बाद एएसआई पलविंदर सिंह अपनी पुलिस टीम के साथ तहसील कार्यालय गए, जहां क्लर्क गुरदीप सिंह ने अपना बयान दर्ज कराया कि शाम लगभग 4.30 बजे, तीन व्यक्ति उनके कार्यालय में आए, जिन्होंने खुद को पत्रकार बताया। उन्होंने नायब तहसीलदार से एक पूरक पत्रिका निकालने के लिए वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। नायब तहसीलदार को संदेह हुआ और उन्होंने उन्हें सत्यापन के लिए उनके पास भेजा क्योंकि वे पत्रकार नहीं लग रहे थे। उन्होंने अपने कार्यालय के स्टाम्प विक्रेता अमरजीत सिंह को बुलाया, जो प्रेस फोटोग्राफर के रूप में भी काम करते हैं। अमरजीत सिंह को देखकर तीनों व्यक्तियों ने भागने की कोशिश की। अमरजीत सिंह ने उनका पीछा किया और जनता की मदद से दो व्यक्तियों को पकड़ने में सफल रहे। तीसरा व्यक्ति भागने में सफल रहा। कुछ पुलिस अधिकारी मौके पर आए और पूछताछ करने पर एक ने अपना नाम राजन जैन निवासी धुरी और दूसरे ने अपना नाम सुनील कुमार उर्फ सोनू उर्फ विशाल निवासी पटियाला बताया। तीसरे व्यक्ति का नाम संजय बताया गया जो भाग गया था। दोनों पत्रकार होने का कोई पहचान प्रमाण प्रस्तुत करने में विफल रहे। बयान दर्ज करने के बाद आरोपियों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। 20 मार्च 2015 को आरोपी संजय कुमार को गिरफ्तार किया गया और 16 जुलाई 2015 को जांच के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। जांच पूरी होने के बाद राजन और सुनील के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया गया। आरोपी राजन जैन पेश नहीं हुआ और उसे 31 मार्च 2017 के भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया गया।