मोहाली। फेज-6 स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) मोहाली का मातृ-शिशु भवन की लिफ्ट करीब तीन माह बाद भी ठीक नहीं हो सकी है। लिफ्ट को शुरू करने का मामला वादों में फंसकर रह गई है। मरीज और तीमारदारों की सांसें कई मंजिला भवन चढ़ते समय फूल रहीं हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवतियों, बुजुर्गों और बीमारों को होती है। इस बारे में लोगों ने कई बार अस्पताल प्रबंधन को अवगत भी कराया है लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। संवाद सहयोगी ने सोमवार दोपहर एक बजे मातृ-शिशु भवन की व्यवस्थाएं देखीं। दिन में करीब एक से दो बजे तक जमीनी हकीकत पता की तो लोग बेहद परेशान नजर आए। गर्मी और उमस के बीच अस्पताल में मरीज और तीमारदार आ-जा रहे थे। एक घंटे के दौरान 12 गर्भवती, चार माताएं नवजात को गोद में लिए और तीमारदारों के साथ तीन बुजुर्ग सीढि़यों और रैंप से ऊपर जाते नजर आए। इनमें से कई महिलाएं हांफती हुईं रुक-रुक कर दीवार का सहारा लेकर चढ़ रही थीं। संवाद
व्हीलचेयर टूटी है
सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब देखने को मिला जब एक महिला व्हीलचेयर पर अपने ससुर को तीसरी मंजिल तक लेकर गई। इस दौरान उसकी सहायता करने कोई भी सहायक वहां नहीं था। अस्पताल में रखीं चार में से दो व्हीलचेयर टूटी पड़ी हैं। एक की फुटरेस्ट गायब है, एक का पहिया जाम है। नर्सिंग स्टाॅफ की मानें तो स्टाफ पहले ही कम है, मरीजों को स्ट्रेचर पर चढ़ाना हर शिफ्ट में थका देने वाला और जोखिम भरा काम बन चुका है।
25 दिन बाद भी लिफ्ट नहीं हुई चालू
19 जून को जब यह मुद्दा उठाया गया था, तो मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नवदीप सैनी ने कहा था कि इंजीनियरिंग विभाग काम कर रहा है, लिफ्ट सात-आठ दिन में चालू हो जाएगी। इसके बावजूद 25 दिन बाद भी लिफ्ट का बटन दबाने पर दरवाजा नहीं खुलता।
चौथी मंजिल पर निर्माण चलने की वजह से लिफ्ट बंद है। इसके अलावा ठेकेदार के साथ पेमेंट से जुड़ी कुछ दिक्कतें हैं, जिसकी वजह से यह स्थिति बनी है। हम प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द यह काम पूरा हो और लिफ्ट चालू की जा सके। - डॉ. भवनीत भारती, डायरेक्टर, एम्स