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Mohali News: बारिश में भी नहीं डिगा किसानों का हौसला, डटे रहे किसान, तिरपाल के नीचे चलता रहा चाय का लंगर

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मोहाली। किसानों का धरना शुक्रवार को चौथे दिन भी मोहाली के फेज-11 से चंडीगढ़ जाने वाले मार्ग पर जारी रहा। दोपहर में हुई तेज बारिश के बावजूद किसान मोर्चे पर डटे रहे और अपने हौसले का प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन एकता (आजाद) के नेता जसविंदर सिंह लोंगोवाल ने सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार जितना आंदोलन को लंबा खींचेगी, उसे उतना ही राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने बारिश से बचने के लिए तिरपाल का इस्तेमाल किया। धरनास्थल पर खड़ी ट्रॉलियों को तिरपाल से ढककर कमरों का रूप दिया गया है, जिनमें पंखे भी लगे हैं।
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बारिश के दौरान भी चाय का लंगर लगातार चलता रहा, जिससे किसानों को गर्म चाय मिलती रही। धरनास्थल पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक एंबुलेंस भी मौजूद है। लोंगोवाल ने कहा कि किसान अपनी मांगें करीब एक महीने पहले ही सरकार को लिखित रूप में दे चुके हैं। उन्होंने जोर दिया कि किसानों की मांगें न तो बहुत आसान हैं और न ही ऐसी हैं जिन्हें पूरा करना असंभव हो। लोंगोवाल ने यह भी कहा कि चुनाव नजदीक हैं और यदि सरकार ने मांगों पर सही फैसला नहीं लिया तो लोग सरकार का पासा पलट सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगों का समाधान हुए बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा।


प्रमुख मांगें और पुराने समझौते

किसानों की प्रमुख मांगों में पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना शामिल है। इस सत्र में पुराने समझौतों को रद्द करने की मांग की गई है। लोंगोवाल ने 78, 79 और 80 धाराओं को रद्द करने की भी मांग रखी। उनका कहना था कि इन फैसलों के लिए सरकार को कोई बड़ा वित्तीय खर्च नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने वन टाइम सेटलमेंट योजना का मुद्दा भी उठाया, जिससे सरकार को करीब 4,000 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही आवारा पशुओं और आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए भी ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।
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न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि उद्योग के मुद्दे

किसानों की मांगों में फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। लोंगोवाल ने बताया कि आलू और अन्य फसलों के लिए किसानों को उचित बाजार नहीं मिल रहा है। उन्हें प्रसंस्करण की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। पंजाब में कृषि उद्योग (एग्रो इंडस्ट्री) लगाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। हालांकि, सरकारों ने इस दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है।



बाढ़ राहत और जल प्रबंधन

किसानों ने नहरों की डी-सिल्टिंग और पानी के रिचार्जिंग पॉइंट बनाने की मांग की है। पंजाब के बांधों की डी-सिल्टिंग और दरियाओं के किनारों को मजबूत करने की भी मांग उठाई गई। लोंगोवाल का आरोप है कि बाढ़ से हुए नुकसान का उचित मुआवजा किसानों को नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की मांगों पर फैसला करना ही पड़ेगा। आज नहीं तो कल सरकार को कोई नतीजा निकालना होगा। किसान बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन समाधान के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा।
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