मोहाली। शहर के फेज-6 लाइटों के टी-पाॅइंट पर स्थित सिविल अस्पताल की दीवार के साथ बिछी साफ पानी की मुख्य पाइप लाइन करीब दो माह से फटी हुई है। प्रशासनिक ढिलाई का आलम यह है कि लगातार हो रही लाखों गैलन पानी की बर्बादी के बावजूद अभी तक इसकी मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका है। एक महीने में पानी के बहाव का दबाव और भी तेज हो गया है।
यह साफ पानी एक गड्ढे और सड़क किनारे से बहता हुआ सीधे बरसाती नाले में जा रहा है। पानी की मात्रा इतनी ज्यादा है कि सड़क के किनारे और बहते हुए रास्ते पर काई तक जम गई है, जिससे फिसलन और गंदगी बढ़ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन पानी रोकने के बजाय टेंडर-टेंडर खेल खेल रहा है। एक तरफ सरकारें पानी बचाओ के बड़े-बड़े नारे और अभियान चलाती हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि यह अभियान सिर्फ नारों तक ही सीमित है।
विभाग ने दिया अप्रूवल में देरी का हवाला
जल आपूर्ति विभाग के एक्सीएन (कार्यकारी अभियंता) माइकल ने इस मामले में देरी स्वीकार करते हुए कहा कि मरम्मत का कार्य शीघ्र शुरू होगा। उन्होंने बताया कि इस मामले में टेंडर आवंटित किया जा चुका है और मरम्मत के लिए आवश्यक सामग्री भी मंगवा ली गई है। चूंकि यह एक बड़ी पाइपलाइन है, इसलिए कार्य शुरू करने से पहले नगर निगम से औपचारिक अनुमोदन (अप्रूवल) लेना जरूरी है। इसकी प्रक्रिया चल रही है और हमें उम्मीद है कि इसी हफ्ते शुक्रवार तक काम हो जाएगा।
दो महीने क्यों लगे
हालांकि, विभाग के इस जवाब से नागरिक संतुष्ट नहीं हैं। सवाल उठा रहे हैं कि अगर पानी की बर्बादी साफ तौर पर दिख रही है, तो अस्थायी रूप से पानी के बहाव को रोकने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया? उनका कहना है कि जब टेंडर और सामग्री का प्रबंध हो चुका था, तो महत्वपूर्ण अनुमति लेने में दो महीने का लंबा समय क्यों लगा? नागरिकों को डर है कि पानी के इस रिसाव से न केवल क्षेत्र में जल संकट गहरा सकता है, बल्कि सड़क की संरचना को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।