मोहाली। सीबीआई की विशेष अदालत ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर ठाकुर दिलीप सिंह को नामधारी संप्रदाय के उत्तराधिकार विवाद और कथित दो हत्या के मामलों से जुड़े कई गंभीर आपराधिक मामलों के संबंध में भगोड़ा (पीओ) घोषित कर दिया है। मामले की सुनवाई विशेष सीबीआई न्यायाधीश बलजिंदर सिंह सरा की अदालत ने आरोपी की लगातार अनुपस्थिति पर सख्त रुख अपनाया है।
अदालत ने कहा कि कई वर्षों से बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद, आरोपी न तो अदालत के सामने पेश हुआ, न ही उसने अपने मौजूदा ठिकाने के बारे में कोई जानकारी दी है। इस मामले की जांच लगभग नौ वर्षों से चल रही है। अदालत ने दिलीप सिंह को 8 अप्रैल तक उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया है। इस तरह की घोषणा के बाद, अधिकारी उसकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं और उसे खोजने के प्रयासों को तेज कर सकते हैं, जिसमें उसके खिलाफ इंटरनेशनल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संभावना भी शामिल है।
यह मामला दिलीप सिंह के खिलाफ अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज कई एफआईआर से संबंधित है। उनको बाद में एक साथ मिलाकर 2017 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई ) को सौंप दिया गया था। इसके बाद एजेंसी ने चंडीगढ़ में मामला दर्ज किया और अपनी जांच शुरू की। दिलीप सिंह पर कथित तौर पर माता चांद कौर की हत्या, सतगुरु उदय सिंह और जगतार सिंह को निशाना बनाने की साजिश रचने और नामधारी अनुयायी अवतार सिंह की हत्या के मामलों में नामजद किया गया है। उत्तराधिकार विवाद की शुरुआत 2012 में सतगुरु जगतार सिंह के निधन के बाद हुई थी उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया था। इसके चलते संप्रदाय के भीतर उत्तराधिकार के लिए कई दावे सामने आए, और अंततः उदय सिंह ने श्री भैणी साहिब में नेतृत्व संभाला, जिसका दिलीप सिंह ने विरोध किया था।