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Mohali News: एएफपीआई मोहाली के दस कैडेट सेना में एक साथ बने अफसर

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भारतीय सैन्य अकादमी में पासिंग आउट परेड में हुए शामिल
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अब तक संस्थान के 136 कैडेट सेना की तीनों विंगों में हैं तैनात
अमर उजाला ब्यरो/संवाद
चंडीगढ़। महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेरटरी इंस्टीट्यूट (एएफपीआई) मोहाली के विद्यार्थियों ने सूबे का नाम रोशन कर दिया। संस्थान के दस कैडेट एक साथ भारतीय सेना में अफसर बने हैं। भारतीय सैन्य अकादमी आईएमए देहरादून में शनिवार को वह पासिंग आउट परेड में शमिल हुए। पंजाब के रोजगार उत्पत्ति, हुनर विकास और प्रशिक्षण मंत्री अमन अरोड़ा ने अफसर बनने वाले युवाओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि इन 10 अधिकारियों के बनने के साथ ही संस्थान से अब तक के 136 कैडेट सेनाओं की तीन विंग में अपनी सेवाएं निभाए रहे हैं। इस मौके मोहाली स्थित संस्थान में खुशी का माहौल था। साथ ही वहां पर पढ़ाई कर रहे कैडेट को इस बारे प्रेरित किया गया। संस्थान के डायरेक्टर मेजर जनरल अजय एच. चौहान ( सेवामुक्त) ने बताया कि अपने कैडेट को अफसर बनते देखने के लिए वह वहां पर मौजूद थे। उन्होंने शुभकामनाएं देने के साथ ही नसीहत दी है कि वह अपने पद की मर्यादा को कायम रखते हुए देश की सेवा में जुट जाएं और पंजाब और देश का नाम रोशन करें। वहीं, पता चला है कि आने वाले दिनों में संस्थान की तरफ से इन्हें सम्मानित किया जाएगा। साथ ही वहां पर पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों से रूबरू करवाया जाएगा।


जब सेना में पंजाबी अफसर कम हुए तो बनाया संस्थान
एक समय ऐसा था जब सेना में पंजाब के अधिकारियों की बहुलता थी। लेकिन इसके बाद युवाओं में विदेश में बसने की चाहत होने लगी। साल 2010 तक सेना में मात्र दो फीसदी पंजाबी अधिकारी बचे। उस समय राज्य में अकाली-भाजपा की सरकार थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को जैसे ही यह पता चला कि सेना में पंजाबी अधिकारियों की कमी हो गई है। उन्होंने तुरंत सेवानिवृत्त अधिकारियों, विशेषज्ञों संग बैठक की। सेना में पंजाबी अधिकारियों की संख्या बढ़ाने पर मंथन किया। बैठक में फैसला हुआ कि महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेरटरी इंस्टीट्यूट मोहाली में स्थापित किया गया।
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संस्थानों के छात्रों ने बार्डर पर बहादुरी के लिए जीते पुरस्कार
एएफपीआई के पूर्व कैडेट जो अब अधिकारियों के तौर पर सेवाएं निभा रहे हैं, वह भी कई अवार्ड जीत चुके हैं। कैप्टन विश्वदीप सिंह जो स्पेशल फोर्सेज में हैं, उनको जनवरी 2021 में बहादुरी के लिए सेना मेडल और लेफ्टिनेंट जसमीत सिंह बामरा जैक राइफल्स को गलवान घाटी में ऑपरेशन के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने प्रशंसा पत्र दिया गया।
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