मोहाली। पंजाब सरकार के खिलाफ कच्चे अध्यापकों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर फूटा। सेक्टर-62 स्थित पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के बाहर बुधवार को कच्चे अध्यापक यूनियन ने जोरदार रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार वादे कर रही है लेकिन बहाली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही। राज्य के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में काम कर चुके ईजीएस, एआईई, एसटीआर, आईईवी और शिक्षा प्रोवाइडर वर्ग के अध्यापक पिछले कई सालों से अपनी बहाली की मांग कर रहे हैं।
यूनियन का कहना है कि इन अध्यापकों ने गांव-गांव जाकर शिक्षा का प्रसार किया है, लेकिन सरकार ने उन्हें अनदेखा कर दिया। प्रदर्शन में महिला शिक्षिकाओं की भी अच्छी खासी भागीदारी रही। लखविंदर कौर, अमनदीप ढालीवाल, वरुण खेड़ा, जसविंदर कौर, रुपिंदर कौर, गुरप्रीत सिंह, गुरसेवक सिंह, करमजीत कौर, मनधीर कौर, हरमनजीत कौर, नवदीप सिंह समेत दर्जनों शिक्षक मौजूद थे। सबका कहना था कि अगर उनकी सेवा बहाल नहीं की गई तो वे पंजाब भर में आंदोलन की चिंगारी फैलाने के लिए तैयार हैं।
सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे यूनियन के प्रदेश प्रधान विकास साहनी ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सत्ता में आने से पहले और यहां तक कि उपचुनावों के दौरान भी मंच से यह ऐलान किया था कि सभी वॉलंटियर अध्यापकों को बिना किसी शर्त के बहाल किया जाएगा। उन्होंने 15 जून को फिल्लौर में हुई बैठक का जिक्र कर बताया कि मुख्यमंत्री ने खुद आदेश दिया था कि विभागीय समिति बनाकर 15 दिनों में बहाली प्रक्रिया पूरी की जाए। साहनी ने कहा कि आज 64 दिन बीत चुके हैं लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ़ समिति बना दी गई है, जबकि बहाली की बात अब तक अधर में लटकी हुई है।
दी चेतावनी, 27 अगस्त के बाद होगा बड़ा आंदोलन
साहनी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर 27 अगस्त को प्रशासन द्वारा गठित समिति के साथ होने वाली बैठक में कोई ठोस हल नहीं निकला और 5 सितंबर (अध्यापक दिवस) तक बहाली का रास्ता साफ नहीं किया गया, तो यूनियन संघर्ष को तेज कर देगी। इस बार आंदोलन इतना बड़ा होगा कि पंजाब सरकार की जड़ें हिल जाएंगी।
माहौल में गुस्सा और बेचैनी
प्रदर्शन के दौरान कई शिक्षकों ने खुलकर कहा कि सरकार ने उन्हें धोखे में रखा है। एक शिक्षिका ने कहा, हमने स्कूलों में सालों तक सेवा दी, लेकिन आज हमें बेरोजगार बना दिया गया। सरकार सिर्फ़ मीटिंग पर मीटिंग कर रही है। दूसरे अध्यापक ने कहा कि अब यह संघर्ष केवल नौकरी का नहीं बल्कि सम्मान और अधिकार का बन चुका है।