शहर में 12 जुलाई से सफाई का काम रुक जाएगा। सफाई मजदूर फेडरेशन और सफाई मजदूर यूनियन ने शुक्रवार को आपात मीटिंग कर हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। वहीं, यूनियन ने इस संबंधी स्थानीय निकाय विभाग के सचिव, डायरेक्टर, डिप्टी कमिश्नर, मेयर व कमिश्नर को नोटिस भेज दिया है। साथ ही यह स्पष्ट किया है कि यदि इस दौरान किसी प्रकार का नुकसान होता है तो उसके लिए सरकार जिम्मेवार होगी।
सफाई मुलाजिम यूनियन के नेताओं ने बताया कि मांगों को लेकर पिछली बार जब हड़ताल हुई थी तो उस समय सरकार और नगर निगम ने अपने स्तर पर मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं हो पाया है।
उन्होंने बताया कि हड़ताल के दौरान उन्हें स्थानीय निकाय विभाग के मंत्री ने सीएम के साथ मीटिंग करवाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन यह बात भी अब तक सिरे नहीं चढ़ पाई है।
नेताओं ने बताया कि 30 अप्रैल को हुई मीटिंग में फैसला लिया गया था कि लगातार चलने वाले काम पर आउट सोर्स या ठेकेदारी के माध्यम कर्मचारी नहीं रखे जाएंगे, लेकिन मोहाली नगर निगम की ओर से इस पर अमल नहीं किया जा रहा है।
मुलाजिम नेताओं ने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय सरकार ने अगस्त 2012 में मोहाली नगर की 450 सफाई सेवकों के पक्के पद मंजूर किए थे, लेकिन नगर निगम द्वारा सफाई का काम ठेके पर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले सफाई का ठेका एक साल के लिए दिया जाता था, लेकिन अब पांच साल के लिए दिया गया है। जो गलत है।
ठेके पर काम करवाने के लिए निगम को हर साल 13 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। उन्होंने कहा कि यदि 328 मुलाजिमों को रेगुलर भी कर दिया जाएगा तो कुल सात करोड़ रुपये की लागत आएगी। ऐसे में निगम को छह करोड़ बच सकते हैं। महासचिव पवन गोडयाल ने लोगों से अपील की है कि हड़ताल पर जाना उनकी मजबूरी है। ऐसे में उनका सहयोग करें।