मोहाली। हाइब्रिड धान की बिक्री पर जिले में पूर्ण पाबंदी को सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तरीय टीम की ओर से विभिन्न मंडियों में व्यापक चेकिंग अभियान चलाया गया। इसकी अगुवाई संयुक्त निदेशक, कृषि (घनी खेती) पंजाब और मोहाली के मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. गुरमेल सिंह ने की। ब्लॉक खरड़, डेराबस्सी और माजरी की मंडियों में बीज विक्रेताओं की दुकानों और गोदामों की गहन जांच डॉ. शुभकरण सिंह, डॉ. रमन करोड़िया, डॉ. गुरदियाल कुमार और डॉ. जसविंदर सिंह की ओर से की गई।
मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. गुरमेल सिंह ने बताया कि पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना की सिफारिशों पर सरकार ने प्रदेश में हाइब्रिड धान की सभी किस्मों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि मंडीकरण के समय किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। विभाग द्वारा इन निर्देशों की सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर बीज विक्रेताओं की दुकानों की चेकिंग की जा रही है, ताकि कोई भी विक्रेता किसानों को प्रतिबंधित हाइब्रिड धान का बीज न बेच सके।
खरड़ के प्रमुख बीज विक्रेताओं ने सरकार और कृषि विभाग की इस नीति का समर्थन करते हुए कहा कि वे इस निर्णय से वाणिज्यिक रूप से भी संतुष्ट हैं। उनका कहना था कि हाइब्रिड बीज मंगवाने के लिए कंपनियों को एडवांस में अधिक पूंजी देनी पड़ती थी, जिससे व्यापार पर बोझ पड़ता था। मुख्य कृषि अधिकारी ने बताया कि अब तक बीज अधिनियम के अंतर्गत कुल 30 सैंपल लेकर परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं को भेजे जा चुके हैं, ताकि गुणवत्ता की जांच की जा सके। उन्होंने बीज डीलरों के पास उपलब्ध निम्न प्रमाणित किस्मों – पी.आर-126, पी.आर-114, पी.आर-128, पी.आर-121, पी.बी.1692, पी.बी.1509, पीबी1401 और पीबी 1718– की बुआई को प्राथमिकता देने की अपील की।
डॉ. गुरमेल सिंह ने किसानों से आग्रह किया कि वे केवल सरकारी स्तर पर स्वीकृत और गुणवत्ता वाले बीजों का ही उपयोग करें, ताकि उन्हें भविष्य में फसल बेचते समय किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े और उपज भी अच्छी हो।